महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ की तर्ज पर मध्य प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग ।
फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों के लिए बीमा और संरक्षण को लेकर सौंपा ज्ञापन।

बैतूल। पत्रकारों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर मध्य भारत वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन ने शुक्रवार को कलेक्टर बैतूल को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। संगठन के पदाधिकारी रामकिशोर पवार और नंदकिशोर पवार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पत्रकार इसमें शामिल हुए। ज्ञापन प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारतीय प्रेस परिषद, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को संबोधित किया गया है।
ज्ञापन में कहा गया कि हाल के वर्षों में पत्रकारों पर हमले, फर्जी एफआईआर, रेत और भू-माफियाओं का दबाव तथा प्रशासनिक स्तर पर प्रताड़ना के मामले बढ़े हैं। इससे पत्रकारों के बीच असुरक्षा का माहौल बन रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
यूनियन ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) और अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार का संरक्षण आवश्यक है, जबकि पत्रकारों पर हो रहे हमले इन अधिकारों का उल्लंघन हैं। ऐसे में राज्य में प्रभावी पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करना जरूरी है।
ज्ञापन में मांग की गई कि पत्रकारों से जुड़े मामलों में पहले विशेष जांच प्रकोष्ठ द्वारा जांच हो और उसके बाद ही एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही मामलों की जांच वरिष्ठ अधिकारियों से कराई जाए और झूठे प्रकरण दर्ज कराने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ड्यूटी के दौरान पत्रकार की हत्या को जघन्य अपराध मानते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की व्यवस्था करने की मांग भी रखी गई।
इसके अलावा पत्रकारों को अवैध हिरासत या प्रताड़ना देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई, हमलावरों पर गैर-जमानती धाराएं, मृतक पत्रकारों के परिवार को आर्थिक सहायता, फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों के लिए बीमा और कैशलेस इलाज की सुविधा तथा काम के दौरान उपकरणों के नुकसान की भरपाई जैसे प्रावधान शामिल करने की मांग की गई। ज्ञापन में महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के मॉडल के आधार पर कानून बनाने का सुझाव भी दिया गया।




