ट्रैक्टर प्रकरण में डेढ़ साल से चार्जशीट लंबित, पुलिस पर गंभीर आरोप।

जांच में लापरवाही का आरोप, डीजीपी और आईजी से की जाएगी शिकायत ।

– मोनिका विजयकर

 

बैतूल। भैंसदेही के ट्रैक्टर प्रकरण में पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। आवेदिका मोनिका विजयकर ने अपने पति राजेश विजयकर से जुड़े मामले में तथ्यात्मक सुधार का आग्रह करते हुए पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि बिना कानूनी स्थिति और केस हिस्ट्री का सत्यापन किए रिपोर्टिंग की गई।

मोनिका विजयकर ने कहा कि उनके पति राजेश विजयकर ने पुलिस को पूरा सहयोग दिया और ट्रैक्टरों की रिकवरी में अहम भूमिका निभाई, इसके बावजूद भैंसदेही पुलिस उन्हें आठनेर थाना क्षेत्र के पुराने मामले में फंसाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि यह मामला करीब डेढ़ साल से लंबित है और अब तक इसमें चार्जशीट पेश नहीं की गई है, जबकि उनके पति को इसी प्रकरण में पूर्व में जेल में रहने के बाद माननीय उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि उपनिरीक्षक द्वारा अपराध क्रमांक 440/2024 की जांच सही तरीके से नहीं की गई और प्रत्येक आरोपी योगेश, बबलू और नासिर खान से कथित रूप से दो-दो लाख रुपये की रिश्वत ली गई। मोनिका विजयकर ने यह भी आरोप लगाया कि उपनिरीक्षक नितिन उनके घर में प्रवेश कर परिवार को धमकाते हुए लगभग सात लाख रुपये की राशि जबरन ले गए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

उन्होंने बताया कि जिन लोगों के पास से ट्रैक्टर जब्त किए गए, उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने एसडीओपी कार्यालय भैंसदेही में अपना बयान दर्ज कराने की जानकारी दी है।

मामले में कानूनी पहलुओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हाई कोर्ट के निर्देशों के बावजूद जांच पूरी होने पर चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने, एक ही घटना में दूसरी एफआईआर दर्ज करने की वैधता और सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित “टेस्ट ऑफ सेमनेस” सिद्धांत के संभावित उल्लंघन का मुद्दा सामने आया है।

मोनिका विजयकर ने उपनिरीक्षक और थाना प्रभारी के खिलाफ उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करने की बात कही है। साथ ही उन्होंने डीजीपी कैलाश मकवाना मध्यप्रदेश और आईजी मिथलेश कुमार शुक्ला नर्मदापुरम से भी शिकायत करने की बात कही है।

इस पूरे मामले में पुलिस का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। आरोपों की पुष्टि और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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