जमीन विवाद में घर के सामने गड्ढा खोदकर रोक दिया आवागमन, हादसे का खतरा।

बैतूल। राजेन्द्र वार्ड में जमीन विवाद के बीच घर के सामने गड्ढा खोदकर आवागमन रोक दिया गया है। न्यायालय का स्टे खारिज होने के बाद भी स्थिति जस की तस रहने से परिवार ने किसी भी अनहोनी की आशंका जताई है।
आवेदक रेखा पाटिल, रामप्रसाद पाटिल और अशोक पाटिल ने एसपी और गंज थाना प्रभारी से की गई शिकायत में बताया कि न्यायालय द्वारा स्टे खारिज किए जाने के बाद भी अनावेदकों द्वारा निर्माण कार्य में लगातार बाधा डाली जा रही है और अब घर के सामने गड्ढा खोदकर रास्ता बंद कर दिया गया है, जिससे कभी भी गंभीर दुर्घटना होने का खतरा बना हुआ है।
खसरा नंबर 372/6 स्थित उनकी स्वामित्व भूमि पर मकान निर्माण कार्य जारी है। इस मामले में पूर्व में अनावेदकों द्वारा न्यायालय में स्टे की मांग की गई थी, जिसे 26 सितंबर 2025 को माननीय प्रथम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड बैतूल द्वारा साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया गया था।
आवेदक रेखा पाटिल ने बताया कि इसके बावजूद 12 अप्रैल को अनावेदक आशा मगरे के कहने पर ब्रजेश उर्फ अक्कू मगरे, ओम मगरे और रूपेश धुर्वे मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य रुकवाने लगे। विरोध करने पर गाली-गलौज की गई, कोर्ट के आदेश को न मानने की बात कही गई और मकान को जेसीबी से तोड़ने व जान से मारने की धमकी दी गई। सूचना पर डायल 112 की पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन कार्रवाई के बजाय दोनों पक्षों को समझौते की सलाह देकर लौट गई।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि इसके बाद अनावेदकों ने घर के सामने गड्ढा खोद दिया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। घर में छोटे-छोटे बच्चे होने के कारण हर समय दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। परिवार ने सवाल उठाया है कि यदि कोई बच्चा या व्यक्ति गड्ढे में गिरकर घायल होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
आवेदकों का कहना है कि उन्होंने पुलिस प्रशासन के सभी स्तरों पर शिकायत कर दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे न्यायालय के आदेश की अवहेलना के साथ-साथ कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर रास्ता खुलवाने, गड्ढा भरवाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि संभावित हादसे को रोका जा सके और उन्हें न्याय मिल सके।




