Consumer Commission orders: उपभोक्ता आयोग के आदेश से किसानों को मिलेगी फसल बीमा राशि, बैंक और बीमा कंपनी करेंगे भुगतान

बैतूल। उपभोक्ता आयोग बैतूल के आदेश के बाद गोठी कॉलोनी और टेमझीरा-ब के किसानों को फसल बीमा राशि के रूप में मुआवजा मिलेगा। बैंक और बीमा कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वे 30 दिनों के भीतर भुगतान करें, अन्यथा ब्याज देना होगा। इस निर्णय से किसानों को राहत मिलेगी और उन्हें अपनी फसल के नुकसान की भरपाई मिल सकेगी।
गोठी कॉलोनी मोती वार्ड के किसान मुकेश, ज्ञानराव, और दिनेश माथनकर को आई.सी.आई.सी.आई. बैंक शाखा गणेश वार्ड बैतूल द्वारा 81,598 रुपये की फसल बीमा राशि दी जाएगी। यह आदेश उपभोक्ता आयोग बैतूल के माननीय अध्यक्ष विजय कुमार पाण्डेय और सदस्य चन्द्रशेखर माकोड़े ने दिया। एडवोकेट दिनेश यादव ने बताया कि इन किसानों की कृषि भूमि ग्राम ससुन्द्रा, तहसील आमला में है और इनका के.सी.सी. खाता आई.सी.आई.सी.आई. बैंक गणेश वार्ड बैतूल में है। बैंक द्वारा बीमा राशि नहीं देने पर आयोग ने बैंक को दोषी मानते हुए मुआवजा देने का आदेश दिया।
टेमझीरा-ब के किसान को मिलेगा 22,299 रुपये का मुआवजा
मुलताई तहसील के ग्राम टेमझीरा-ब के किसान रामदयाल पिता रोन्या चौरसिया को बीमा कंपनी द्वारा 22,299 रुपये की फसल बीमा राशि दी जाएगी। आयोग ने पाया कि राजस्व विभाग से कट-ऑफ-डेट के पूर्व नुकसानी की रिपोर्ट मिलने के बावजूद बीमा कंपनी ने बीमा राशि नहीं दी थी, जिसके कारण कंपनी को दोषी माना गया।
समय पर भुगतान न करने पर लगेगा ब्याज
आयोग ने आदेश दिया है कि यदि 30 दिनों के भीतर किसानों को भुगतान नहीं किया जाता है, तो परिवाद प्रस्तुत दिनांक से भुगतान दिवस तक 6 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। एडवोकेट दिनेश यादव ने बताया कि यह फैसला किसानों के लिए एक बड़ी राहत है और यह सुनिश्चित करता है कि बैंक और बीमा कंपनियां अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन करें। यह निर्णय अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बनेगा, जिससे वे भी अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा सकें। उपभोक्ता आयोग के इस फैसले ने न्याय की जीत और किसानों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
बोवनी खराब होने पर मिलती है फसल बीमा राशि
वर्तमान खरीफ सत्र में बहुत से किसानों की सोयाबीन या अन्य खरीफ फसल बीज खराब होने या वर्षा कम या अधिक होने के कारणों से बोवनी खराब होती है तो ऐसे किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल बीमा राशि प्राप्त करने के अधिकारी होते है।
एडवोकेट दिनेश यादव ने बताया कि जिन किसानों की खरीफ फसल की बोवनी खराब हुई है, ऐसे किसानों को फसल बीमित राशि की 25 प्रतिशत राशि योजना अनुसार दी जानी चाहिए, इसमें शर्त यही है कि जिन बैंको में किसानों का के.सी.सी. खाता है उन बैंको द्वारा किसानों के कृषि ऋण से बीमा प्रीमियम राशि जमा किया जाना आवश्यक है। यदि किसान डिफाल्टर है या उसका के.सी.सी. ऋण नहीं है तो ऐसे किसानों केा अऋणी कृषक के रूप में बीमा कराया जाना आवश्यक है। इस योजना के अनुसार एक बार बीमा राशि प्राप्त करने के बाद वर्तमान खरीफ सत्र में शेष बीमा आवरण से किसान बाहर हो जाता है, याने कि इसी फसल में यदि बाद में कोई नुकसानी होती है तो वह बीमा राशि प्राप्त करने का अधिकारी नहीं होगा। बहुत से किसानों की खरीफ फसल बोनी बीज खराब होने, दवाई के कारण और वर्षा के कारण खराब होती है, ऐसे किसानों को बीमा कंपनी, कृषि विभाग, तहसीलदार व बैंक को आवेदन देकर अपनी बोनी बिगड़ने के संबंध में सूचना देना चाहिए तथा शासन द्वारा गठित जिला स्तरीय तकनीकि समिति द्वारा किसान की कृषि भूमि का निरीक्षण कर रिपोर्ट बनाया जाना चाहिए तथा ग्रामीणों के समक्ष पंचनामा के साथ फोटो व अखबार की पेपर कटिंग भी साक्ष्य के रूप में उपयोग हो सकती है, ताकि वे अपनी नुकसानी का क्लेम कर सके। इस योजना के अंतर्गत जिलों के लिए निर्धारित बैंक ऋणमान की 25 प्रतिशत राशि किसान को बीमा क्लेम के रूप में मिल सकती है। खण्डवा जिले में सोयाबीन का ऋणमान 40000/रू प्रति हेक्ट. है यहाँ किसान की बोनी बिगड़ने पर 10000/रू प्रति हेक्टे. बीमा क्लेम राशि मिल सकती है। इसी प्रकार नर्मदापुरम संभाग के अंतर्गत हरदा, नर्मदापुरम व बैतूल जिले में सोयाबीन फसल का ऋणमान 37500/रू. प्रति हेक्टे. है यहाँ के किसानों को 9400/रू. प्रति हेक्टे. बीमा क्लेम राशि मिल सकती है।

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