सेवानिवृत्ति के अंतिम दिन भी कर्तव्यनिष्ठ रहे शिक्षक बहादुर मासतकर
27 वर्ष 8 माह की सेवा में विद्यार्थियों के भविष्य को दी दिशा

बैतूल। मुलताई तहसील अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरखेड़ में शिक्षक कर्तव्यनिष्ठा की एक प्रेरणादायी मिसाल उस समय देखने को मिली, जब विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक बहादुर मासतकर ने अपनी सेवा समाप्ति के अंतिम दिवस 31 जनवरी को भी शासन द्वारा निर्धारित कैरियर गाइडेंस कार्यक्रम में प्रभारी शिक्षक की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभाई।
सेवानिवृत्त होते हुए भी उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि एक शिक्षक के लिए सेवा कभी समाप्त नहीं होती।
कैरियर गाइडेंस कार्यक्रम के दौरान शिक्षक बहादुर मासतकर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कैरियर गाइडेंस विद्यार्थियों के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे वे अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए सतत प्रयासशील बने रहते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक के लिए उसके सभी छात्र समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं और एक सच्चा शिक्षक अपने विद्यार्थियों को सदैव अपने बच्चों की तरह महत्व देता है।
सेवानिवृत्ति अवसर पर आयोजित विदाई समारोह में शिक्षक बहादुर मासतकर ने अपने स्वयं के व्यय से विद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं को अंकसूची व अन्य आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखने हेतु फाइलें तथा कलम (पेन) का सेट भेंट किया। उन्होंने बताया कि कलम का महत्व विद्यार्थियों को सदैव प्रेरित करता रहे, इसी उद्देश्य से यह छोटा सा प्रयास किया गया है।
– एक ही विद्यालय में पूर्ण की शासकीय सेवा
विद्यालय के प्राचार्य इन्द्र कुमार मालवीय ने जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षक बहादुर मासतकर ने अपनी 27 वर्ष 8 माह की संपूर्ण शासकीय सेवा एक ही विद्यालय शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरखेड़ में पूर्ण की और यहीं से सेवानिवृत्त हुए। उनके कार्यकाल को विद्यालय के लिए अनुकरणीय बताया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. दिलीप नागवंशी, सुनील पनंदराम प्रधान आरक्षक दुनावा, आर. महाते, सी.एल. भोयरे, श्री साहू सहित विद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मंच संचालन बी.आर. मालवीय एवं मारोती नागले द्वारा किया गया। सेवानिवृत्ति के अवसर पर विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों एवं ग्रामीणजनों ने शिक्षक बहादुर मासतकर को हर्षोल्लास और सम्मान के साथ विदाई दी। इस अवसर पर शिक्षक की धर्मपत्नी श्रीमती आशा बहादुर मासतकर ने भावुक शब्दों में कहा कि उनके पति ने सदैव समय का पालन करते हुए विद्यालय जाना, पारिवारिक दायित्वों के साथ-साथ शाला की जिम्मेदारियों का भी पूरी निष्ठा से निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि वे हर कदम पर कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ खड़ी रहीं और इस सेवा यात्रा पर उन्हें गर्व है।





