सात दिवसीय कोयापुनेम गोण्डी धर्म संस्कृति गाथा का समापन।

गोण्डी संस्कृति संरक्षण का समाजजनों ने लिया संकल्प। समाज सुधार और पेनकड़ा परंपरा संरक्षण पर हुआ मंथन।

बैतूल। रामपुर रैय्यत (काजरीढाना) में आयोजित सात दिवसीय कोयापुनेम गोण्डी धर्म संस्कृति गाथा का भंडारे और सामूहिक आभार के साथ समापन हो गया। आयोजन में पाठमुख धुर्वे पेनकड़ा कुटुंब परिवार, महादेव झोली भगत, भूमका, लग्न्या और नवगठित पेनकड़ा समिति की सक्रिय भागीदारी रही। आयोजन समिति ने इसे समाज और संस्कृति संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया।

कार्यक्रम का शुभारंभ 14 मई को धर्माचार्य तिरुमाल रामभरोस सरयाम, रामगढ़ तहसील चौरई जिला छिंदवाड़ा की उपस्थिति कलश यात्रा, घटस्थापना और बड़ादेव मूर्ति स्थापना के साथ हुआ था। 15 से 22 मई तक चले आयोजन में धुर्वे कुटुंब परिवार ने तन-मन-धन से सहयोग दिया और गोण्डी भाषा व संस्कृति को अपनाने का संदेश दिया।

समापन कार्यक्रम में राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग में राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त पूर्व विधायक एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तिरुमाल मंगलसिंग धुर्वे, जिला पंचायत व शिक्षा समिति अध्यक्ष तिरुमाल हंसराज धुर्वे, शोध-बोध संस्थान सुखवान प्रमुख जंगुसिंग धुर्वे सहित राकेश धुर्वे, शिवजी धुर्वे, तुलसी धुर्वे, हरिशंकर धुर्वे, छन्नु सिंह धुर्वे और राधेलाल धुर्वे मौजूद रहे। बड़ी संख्या में मातृ शक्ति, पितृ शक्ति और समाजजन शामिल हुए।

आयोजन के दौरान गोण्डी संस्कृति और पेनकड़ा रीति-रिवाजों के संरक्षण पर मंथन किया गया। समाज सुधार से जुड़े विभिन्न प्रस्ताव पारित कर जिम्मेदारियां तय की गईं। पाठमुख धुर्वे पेनकड़ा समिति रामपुर रैय्यत (काजरीढाना) के निर्विरोध मनोनीत अध्यक्ष तिरु गुप्पा धुर्वे ने सभी आगंतुकों का आभार जताते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। सचिव राकेश धुर्वे ने धर्माचार्य, संगीत टीम और सहयोगकर्ताओं को धन्यवाद दिया।

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