भारत मुक्ति मोर्चा और भारतीय विद्यार्थी मोर्चा ने अंबेडकर चौक पर दिया धरना
जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था के साथ 11 मांगों के समर्थन में राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन/ एनटीए की समीक्षा, नई शिक्षा नीति में संशोधन, रिक्त पदों पर भर्ती, समान शिक्षा की व्यवस्था करने और पेपर लीक रोकने की मांग

बैतूल। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विद्यार्थियों से जुड़े राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर भारत मुक्ति मोर्चा एवं भारतीय विद्यार्थी मोर्चा ने शुक्रवार 31 जुलाई को डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद कलेक्टर महोदय बैतूल के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम 11 सूत्रीय माँगों का ज्ञापन सौंपकर नीट-यूजी परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच सहित शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि नीट-यूजी परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं ने करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा, पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
ज्ञापन में ईवीएम आधारित चुनाव प्रणाली की समीक्षा, एआईआईएमएस की निगरानी में पारदर्शी नीट परीक्षा व्यवस्था लागू करने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में संशोधन, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय समीक्षा, नीट और एसएससी (सीजीएल) सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पर प्रभावी रोक, वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने तथा केंद्र और राज्य सरकारों के सभी विभागों में रिक्त पदों पर नियमित भर्ती शुरू करने की मांग की गई।
संगठनों ने जंतर-मंतर पर आंदोलन करने वाले छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच, छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, देशभर में समान शिक्षा व्यवस्था और समान शुल्क नीति लागू करने तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर की लगभग 52 प्रतिशत कम की गई सीटों को पूर्ववत बहाल करने की मांग भी की। ज्ञापन में कहा गया कि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई से विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित होगा और शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत होगा।
भारत मुक्ति मोर्चा एवं भारतीय विद्यार्थी मोर्चा ने पुनः स्पष्ट किया है कि यदि राष्ट्रपति द्वारा उपरोक्त सभी 11 मांगो पर संतोषजनक कार्यवाही नहीं की गई तो इस राष्ट्रव्यापी जनांदोलन के दूसरे चरण में 20 अगस्त 2026 को भारत के सभी 700 जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन एवं ज्ञापन तथा 22 सितंबर 2026 को राज स्तरीय महारैली प्रदर्शन करने पर बाध्य होना पड़ेगा जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी केंद्र सरकार की होगी।




