20 वर्ष बाद एक साथ मिले पुराने दोस्त
इंजीनियर, प्रोफेसर, आर्मी ऑफिसर बने पुराने दोस्त

बैतूल। कोसमी डेम के पास एक भावुक और ऐतिहासिक मिलन समारोह का आयोजन हुआ। इस अवसर पर छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर चुके 2000 से 2020 तक के सभी सत्रों के नए-पुराने मित्रगण एकत्रित हुए। छात्रावास में साथ बिताए पलों की यादों को ताजा करते हुए सभी ने इस मिलन को एक यादगार क्षण बना दिया।
जो छात्रावास में पढ़कर आज इंजीनियर, प्रोफेसर, शिक्षक, सेना अधिकारी, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य विभिन्न क्षेत्रों में ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं, वे सभी पहली बार इतने वर्षों बाद एकसाथ बैठे। जब कोई व्यक्ति अपने परिवार से वर्षों बाद मिलता है, तो वह पल बेहद भावुक होता है, और ऐसा ही दृश्य कोसमी डेम पर देखने को मिला।
इस कार्यक्रम में विशेष रूप से शैलेंद्र वाइकर, अमित सातनकर, संजू पाटिल, दिलीप बामने, माधवराव सरनेकर, पहलाद गोहे, दवडे, राकसे, बचले, बराहे, पवन बेले, बिसोने सहित अनेक पुराने मित्रगणों ने अपने-अपने विचार साझा किए। उन्होंने भविष्य के उद्देश्यों और मिलन समारोहों को नियमित रखने पर भी सहमति जताई।
समारोह के दौरान सभी ने एक साथ बैठकर खिचड़ी, पुलाव और मट्ठे का आनंद लिया। सभी मित्रों ने एक-दूसरे के साथ पुनः जुड़कर अपने छात्रावास परिवार को जीवंत रूप में देखा और महसूस किया। इस आयोजन में प्रेम सूर्यवंशी, मनोज आठोले, राजू नागले, कमलेश नागले, अजाब राव पंडोले, राजू पीपरदे, संदीप उपराले, अनिल उपराले, कमलेश पहाड़े, विजय मांडवे, सुनील मांडवे सहित अनेक पुराने साथी उपस्थित रहे। जो साथी किसी कारणवश इस बार उपस्थित नहीं हो सके, उनके लिए यह अपील की गई कि वे आगामी मीटिंग का हिस्सा बनें।दूर-दराज से आए सभी मित्रों, विशेष रूप से संजू पाटिल, दीपक रजने, निमेष और अन्य सभी मित्रगणों का विशेष आभार व्यक्त किया गया, जिन्होंने अपनी उपस्थिति से इस आयोजन को सफल बनाया। सभी ने एकमत से तय किया कि अगली बैठक की तिथि जल्द ही निर्धारित की जाएगी ताकि छात्रावास परिवार की यह परंपरा आगे भी जीवित रह सके।




