Betul news: शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में छात्रावास निर्माण पर विवाद
पार्षद ने कलेक्टर से की शिकायत, बस स्टैंड के पीछे या हरदा रोड पर निर्माण की मांग

बैतूल। चिचोली के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में जनजातीय कार्य विभाग द्वारा छात्रावास निर्माण का कार्य शुरू किया गया है, जिस पर वार्ड क्रमांक 15 की पार्षद नेहा रूपेश ऑर्य ने कलेक्टर से शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कलेक्टर को दिए ज्ञापन में कहा है कि यह निर्माण कार्य विद्यालय परिसर के बच्चों की खेल-कूद गतिविधियों को बाधित कर रहा है, क्योंकि पहले से ही वहां मैदान छोटा है।
विद्यालय की जमीन पर कब्जे का आरोप
ज्ञापन में बताया गया कि विद्यालय परिसर की जमीन पर सत्तापक्ष से जुड़े रसूखदारों द्वारा कब्जा कर लिया गया है, जिसके चलते छात्रावास के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। पहले भी इस मामले में कई बार शासन को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब वहां पर छात्रावास का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
वर्तमान छात्रावास के स्थान पर निर्माण की मांग
पार्षद ने बताया कि वर्तमान में छात्रावास हरदा रोड पर संचालित हो रहा है, जो छात्रावास निर्माण के लिए उपयुक्त स्थान है। वहां पर पर्याप्त जमीन भी उपलब्ध है। इसके अलावा, बस स्टैंड के पीछे पुरानी प्राथमिक शाला की जमीन, जो पहले से डिस्मेंटल हो चुकी है, भी छात्रावास के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
भू-माफियाओं का दबाव
नेहा रूपेश ऑर्य ने आरोप लगाया कि भू-माफियाओं के दबाव के कारण बस स्टैंड के पीछे या हरदा रोड पर छात्रावास का निर्माण नहीं किया जा रहा है, और इसके बजाय उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में छात्रावास का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे वहां के बच्चों की सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त पर भी सवाल उठाते हुए उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि विद्यालय का वर्तमान भवन पुराना हो चुका है और भविष्य में वहां नए भवन के निर्माण के लिए जगह नहीं बचेगी। अतः यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि छात्रावास का निर्माण किसी अन्य स्थान पर कराया जाए। पार्षद ने कलेक्टर से अनुरोध किया है कि विद्यालय परिसर की संपूर्ण जमीन का सीमांकन कराया जाए और इस मामले में जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त की भूमिका की जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यह निर्णय छात्रों के भविष्य और विद्यालय की गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए लिया जाना चाहिए।




