तीन करोड़ के कचरा निष्पादन मामले में 15 दिन बाद भी जवाबदेही का इंतजार।

जाकिर हुसैन वार्ड की कांग्रेस पार्षद ने पूरे मामले को लेकर एक बार फिर उठाए सवाल।

बैतूल। शहर के गौठाना ट्रेचिंग ग्राउंड की लगभग तीन करोड़ रुपये की लीगेसी वेस्ट सफाई परियोजना को लेकर जाकिर हुसैन वार्ड की कांग्रेस पार्षद नंदिनी तिवारी ने एक बार फिर सत्ता और प्रशासन की कार्यशैली पर तीखा सवाल खड़ा किया है। उनका कहना है कि मामला सामने आए करीब पंद्रह दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक ऐसी कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी जिससे यह लगे कि पूरे प्रकरण की जड़ तक पहुंचने की गंभीर कोशिश हो रही है।

पार्षद नंदिनी तिवारी का कहना है कि तीन करोड़ रुपये की परियोजना में केवल मुख्य नगर पालिका अधिकारी और उपयंत्री को निलंबित कर देना पूरे प्रकरण का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतनी बड़ी वित्तीय परियोजना का निर्णय और भुगतान केवल दो अधिकारियों के स्तर पर संभव है। उनके मुताबिक यदि ऐसा माना जाए तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया की वास्तविकता से आंखें मूंदने जैसा होगा।

नंदिनी तिवारी ने कहा कि नगर पालिका की वित्तीय व्यवस्था स्पष्ट रूप से बताती है कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी अकेले करोड़ों के भुगतान का निर्णय नहीं ले सकते। ऐसे में लगभग तीन करोड़ रुपये के कार्य में हुए भुगतान की स्वीकृति किन-किन स्तरों से मिली, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है। उनका कहना है कि जब तक पूरे वित्तीय और प्रशासनिक ढांचे की भूमिका सामने नहीं आएगी, तब तक कार्रवाई अधूरी ही मानी जाएगी।

पार्षद ने आरोप लगाया कि नगर पालिका की योजनाएं जनता के कर और सरकारी संसाधनों से संचालित होती हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की अनियमितता सीधे जनता की गाढ़ी कमाई के दुरुपयोग के समान है। उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों रुपये की परियोजना में गड़बड़ी की आशंका सामने आई है तो इसकी जांच केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वास्तविक जिम्मेदारों तक पहुंचना ही प्रशासन की विश्वसनीयता की असली कसौटी है।

– सवाल अभी बाकी हैं

नंदिनी तिवारी का कहना है कि जब जांच में अनियमितता स्पष्ट हो चुकी है, तब यह जरूरी है कि परियोजना की वित्तीय स्वीकृति, भुगतान प्रक्रिया और कार्य की निगरानी से जुड़े सभी स्तरों की भूमिका सार्वजनिक की जाए। यदि तीन करोड़ रुपये की योजना में कहीं भी लापरवाही या गड़बड़ी हुई है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी तय होना चाहिए, क्योंकि आखिरकार यह पैसा जनता का है और जनता को ही इसका जवाब चाहिए।

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