आखिर वोट क्रांति से देश को क्या हासिल होगा?
धरती,नदी , गौ प्रकृति के लिए यह क्रांति क्यों नदारद है? क्या इसे ही समझदार वोटर और वोट की क्रांति कहते है?

हमने देश में आजादी के लिए 1857 की क्रांति सुनी थी, हरित क्रांति सुनी थी, श्वेत क्रांति सुनी थी और अब चुनावों में बंपर वोटिंग को कहा जा रहा है _वोट क्रांति हो गई।
देश की आजादी के लिए हुई क्रांति से देश आजाद हुआ समझ आया, हरित क्रांति से देश खाद्यान्न में आत्मनिर्भर हुआ बात समझ आई , श्वेत क्रांति से देश दूध में कुछ कर पाने सफल हुआ बात समझ आई लेकिन वोट क्रांति से देश को क्या हासिल हुआ। एक पार्टी चुनाव हार जाएगी , दूसरी जीत जाएगी ।पहले दीदी लाल बत्ती में घूम रही थी , अब भैया लाल बत्ती में घूमने लगेंगे। इस वोट की क्रांति से सांसदों को दिल्ली में रहने के लिए 5000 वर्ग फीट का आलीशान फ्लैट मिल गया, वोट क्रांति से सांसदों विधायकों मंत्रियों को उच्च सुविधा वेतन भत्ते मिल गए लेकिन इस क्रांति से देश को क्या मिला? क्रांति करने वाले वोटर को मुफ्त की योजनाएं मिल गई, वोटर की बहन बेटियों की शादी वोट क्रांति करवाने लगी, वोट क्रांति मुफ्त में मां बहनों के खाते में पैसे पहुंचाने लगी। अविवेकी वोट की क्रांति ने देश के नागरिक को धरती, नदी, गौ, प्रकृति के लिए काम करने के प्रति लापरवाह बना दिया। इस अविवेकी वोट क्रांति ने नागरिक के भारतीय होने के बोध को समाप्त करा दिया। वह भारतीय छोड़ इस देश में सब कुछ है। वह बंगाली है, वह मद्रासी , वह हिंदू है, वह मुसलमान है, वह कांग्रेसी है, वह भाजपाई है, वह लेफ्टिस्ट है, वह समाजवादी है, बस वह भारतीय नहीं है।
वोट पाकर नेता खुश वोट देकर वोटर खुश _इसे ही तो कहते है वोट क्रांति _लोकतंत्र का मजबूत होना। एक मुफ्त की योजनाएं बांटकर सत्ता प्राप्त कर खुश है, दूसरा वोट देकर मुफ्त की योजनाएं लेकर खुश है। सत्ता के लिए राजनैतिक दल अविवेकी वोट क्रांति करवा रहे है।
आखिर धरती, नदी, प्रकृति, गौ माता के लिए कब क्रांति होगी? इस देश में इन माताओं की खुले आम हत्या कर दी जा रही है। विडंबना देखिए 90 प्रतिशत से अधिक नागरिक वोट डालने पहुंचने लगे लेकिन नदियों की अविरलता निरंतरता की चिंता करने उसके किनारे कितने वोटर पहुंच रहे है? धरती की सेवा करने कितने वोटर चिंतित है? जब सत्ता से जुड़ा कोई समाजसेवक नदी के किनारे पहुंचता है, तब ही वोटर भी उसको मुंह दिखाने वहां जल गंगा संवर्धन करने जल कुंभी हटाने पहुंचता है।
धरती मां का मुंह पॉलीथिन प्लास्टिक डिस्पोजल से भर दिया है, नदी मां को बहने से रोक दिया है, गौ मां को पॉलीथिन प्लास्टिक डिस्पोजल में भोजन झूठन रखकर हत्या की जा रही हैं, प्रकृति में हरे भरे पेड़ो को काटा जा रहा है, वन्य जीवो का जीवन संकट में डाल दिया है, कौनसा वोटर क्रांति करने के लिए तैयार है? मुफ्त की योजनाओं से पेट पल रहा हैं फ़िर क्यों कोई धरती, नदी, गौ, प्रकृति के लिए क्रांति करने चला?इस देश में वोट की क्रांति है, क्योंकि मुफ्त की योजनाओं का लाभ लेना है तो लाइन में लग_ लग कर लोकतंत्र को मजबूत किया जा रहा हैं, धरती नदी गौ प्रकृति कमजोर होकर मर रही है , भारत के वोटर और राजनैतिक दलों के नेताओ सरकारों को उससे कोई लेना देना नहीं बचा हैं। एक से नाराज होंगे दूसरे को जीता देंगे हो गई वोट की क्रांति। आखिर इस वोट कि क्रांति से देश को क्या मिला! जरा सोचिए समझिए। आप वोट क्रांति करके देश लोकतंत्र को मजबूत नहीं खोखला कर रहे है क्योंकि यह अविवेक हीन वोट क्रांति केवल सत्ता की लड़ाई का हिस्सा है इससे ज्यादा कुछ नहीं।
हेमन्त चंद्र दुबे बबलू




