निरोगी काया ही सबसे बड़ा सुख: देवी ज्ञानेश्वरी।
गुरुमाता ने बताई आध्यात्मिक जीवन की आवश्यकता। रावा-गौला बना आध्यात्मिक चेतना का केंद्र, सैकड़ों श्रद्धालुओं ने ली मां बगलामुखी मंत्र दीक्षा।

बैतूल। मुलताई क्षेत्र स्थित रावा-गौला गांव में आयोजित मां बगलामुखी साधना एवं मंत्र-दीक्षा शिविर का 28 मई को समापन हुआ। परम पूज्य गुरुमाता देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी के सानिध्य में आयोजित इस शिविर में क्षेत्र सहित दूर-दराज के गांवों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मां भगवती पीताम्बरा बगलामुखी की विधिवत मंत्र-दीक्षा ग्रहण कर आध्यात्मिक साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
गुरुमाता देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर अपार दिव्य शक्ति विद्यमान है, लेकिन अज्ञान, भय और भौतिक व्यस्तताओं के कारण व्यक्ति अपनी वास्तविक क्षमता को पहचान नहीं पाता। उन्होंने कहा कि गुरु-दीक्षा और नियमित साधना से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है, सातों चक्र सक्रिय होते हैं तथा साधक आत्मिक शांति और आत्मज्ञान की अनुभूति करता है।
उन्होंने मां बगला भवानी की साधना को आत्मबल, मानसिक दृढ़ता और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करने का माध्यम बताते हुए कहा कि इससे व्यक्ति में साहस, संयम और आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है। गुरुमाता ने दस महाविद्याओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये शक्ति के विभिन्न स्वरूप हैं, जो साधक को भय, अज्ञान और नकारात्मकता से मुक्त कर आत्मबोध की ओर ले जाते हैं।

शिविर संयोजक आचार्य रविन्द्र मानकर ने ग्रामीण क्षेत्रों में तंत्र-मंत्र के नाम पर फैल रहे अंधविश्वास और भय से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां बगलामुखी के जयकारों के साथ समाज में सद्भाव और आध्यात्मिक जागरण फैलाने का संकल्प लिया।



