आदिवासी मुद्दों पर मंथन के लिए 5 जून को होगी बड़ी बैठक, नई कार्यकारिणी का होगा गठन।

जमीन कब्जे, वन अधिकार और धर्म कोड की मांग पर आदिवासी समाज करेगा रणनीति तय । म.प्र. आदिवासी विकास परिषद का जिला व विकासखंड स्तर पर होगा विस्तार । नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निर्देश पर बैतूल में संगठन विस्तार अभियान तेज।

बैतूल। जिले में आदिवासी समाज से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श तथा संगठनात्मक विस्तार को लेकर 5 जून को म.प्र. आदिवासी विकास परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आदिवासी मंगल भवन पढ़ापेन ठाना बैतूल में दोपहर 12 बजे से आयोजित की जाएगी। बैठक में जिला स्तरीय एवं विकासखंड स्तरीय नई कार्यकारिणी के गठन और विस्तार के साथ-साथ समाज के समक्ष मौजूद विभिन्न समस्याओं पर व्यापक चर्चा की जाएगी।

म.प्र. आदिवासी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष मुन्नालाल वाड़िवा ने बताया कि परिषद के प्रदेशाध्यक्ष एवं मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निर्देशानुसार जिले में संगठन विस्तार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 5 जून को आयोजित बैठक में जिला और विकासखंड स्तर पर नई कार्यकारिणी के गठन एवं विस्तार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

बैठक में आदिवासी समाज पर हो रहे अत्याचार, सामाजिक सरोकारों, जनगणना में आदिवासी धर्म कोड की मांग, आदिवासी अधिकारी-कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों, आदिवासी भूमि पर गैर-आदिवासियों द्वारा किए जा रहे कथित कब्जों तथा वन अधिकारों से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। परिषद का कहना है कि इन समस्याओं और मांगों को संकलित कर विधानसभा के पटल पर उठाने का प्रयास किया जाएगा।

मुन्नालाल वाड़िवा ने जिले के सभी आदिवासी सामाजिक संगठनों, अधिकारी-कर्मचारी संगठनों, सामाजिक एवं राजनीतिक प्रतिनिधियों तथा समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में बैठक में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रतिभागी अपनी समस्याएं और सुझाव बैठक में रख सकते हैं, ताकि उन्हें प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाकर समाधान के प्रयास किए जा सकें।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि लगभग 15 दिन बाद भोपाल में परिषद के सक्रिय सदस्यों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रदेशाध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। परिषद का उद्देश्य संगठन को मजबूत बनाते हुए आदिवासी समाज की समस्याओं को प्रभावी ढंग से शासन-प्रशासन के समक्ष रखना है।

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