Success : इशारों से सीखे ताईक्वांडों के दांव-पेंच, अब गोल्ड जीतने का बनाया लक्ष्य

राष्ट्रीय ताईक्वांडों प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पहुंची भाेपाल की मूक बधिर कनिष्का शर्मा

 

Flight Of Courage: बैतूल। बोलने और सुनने की क्षमता न रखने वाली 15 वर्षीय तनिष्का इशारों से ताइक्वांडों के दांव-पेंच सीखकर राष्ट्रीय प्रतियाेगिता में सिल्वर जीतने में कामयाब हो चुकी हैं। अब बैतूल में हो रही राष्ट्रीय ताईक्वांडो प्रतियोगिता में उनकी नजर गोल्ड पर है।

युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्राेत बनी कनिष्का ने जन्म से मिली कमी को कभी अपने उपर हावी नहीं होने दिया और माता-पिता के प्रोत्साहन के बलबूते पर स्वयं को ताईक्वांडों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के काबिल बना लिया है। बैतूल में रविवार से प्रारंभ हुई नेशनल चैम्पियनशिप में उसका लक्ष्य ना सिर्फ गोल्ड मेडल जीतने का है बल्कि डेफ ओलंपिक खेलने का भी मजबूत इरादा है।

भोपाल निवासी कपिल और प्रियंका शर्मा की बेटी कनिष्का जन्म से ही बोलने और सुनने की क्षमता नहीं रखती थी। उन्होंने बताया कि बेटी के जन्म के करीब ढाई वर्ष बाद इस बारे में पता चला तो देश भर में कई चिकित्सकों से परामर्श लिया लेकिन 91 प्रतिशत तक दिव्यांगता होने के कारण उसका उपचार संभव नही हो पाया। स्कूल में भी सामान्य बच्चों के साथ वह पढ़ नहीं पा रही थी इस कारण से उसे आशा निकेतन स्कूल में भर्ती किया।स्कूल में अभी वह कक्षा सातवीं में पढ़ रही है और साइन लैंग्वेज सीखने के बाद सारी बातों को समझकर प्रतिक्रिया भी बेहतर ढंग से देती है।

माता-पिता ने बेटी को ताईक्वांडों में पारंगत करने का संकल्प लिया और आज कनिष्का स्टेट में पांच चैम्पियनशिप खेलकर गोल्ड जीत चुकी है। दिव्यांगता के बावजूद भी कनिष्का ने अच्छे-अच्छे खिलाडिय़ों को पटकनी दी है।वर्ष 2023 में बैंगलुरु में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उसने सिल्वर मेडल जीता है। वर्तमान में कनिष्का मध्यप्रदेश की स्पोट्र्स एकेडमी में है और वह वल्र्ड ताइक्वांडो और डेफ ओलंपिक की तैयारी कर रही है।

कनिष्का के कोच दीपक सिंह ने बताया कि शुरूवात में ताइक्वांडो सिखाने में जरूर दिक्कत आती थी लेकिन अब वह सामान्य बच्चों की तरह ही रिस्पांस करती है। कनिष्का काफी मेहनती है और उसका प्रदर्शन भी अन्य बच्चों से अलग होता है। बैतूल में हो रही चैम्पियनशिप में कनिष्का इकलौती दिव्यांग बच्ची है। कनिष्का के साथ पिछले एक वर्ष से टूर्नामेंट खेल रहीं आयुषी सिंह ने बताया कि कनिष्का को देखकर हमें भी मोटिवेशन मिलता है कि जब वह यह सब करती है तो फिर हम क्यों नहीं कर सकते हैं।

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