कोर्ट का आदेश: मुलताई नपा अध्यक्ष का चुनाव शून्य, एक माह में कराने होंगे चुनाव
कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा झटका,

Betul News : बैतूल। भाजपा से बगावत कर मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष के पद का चुनाव लड़ने वाली नीतू प्रहलाद परमार की कुर्सी चली गई है। कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि पूर्व मंत्री और मुलताई विधायक सुखदेव पांसे के समर्थन से अध्यक्ष पद पर काबिज होने के बाद नीतू परमार ने अपने समर्थकाें के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया था।
मंगलवार को मुलताई के एडीजे कोर्ट ने अध्यक्ष के चुनाव को शून्य करते हुए बैतूल कलेक्टर एक माह के भीतर अध्यक्ष पद का दोबारा चुनाव कराने के लिए आदेश दिया है। मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव में गड़बड़ी को लेकर भाजपा की ओर से अध्यक्ष पद की प्रत्याशी वर्षा गढेकर ने मुलताई के प्रथम अपर जिला न्यायालय में अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय के माध्यम से याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई करते हुए मंगलवार को प्रथम अपर जिला न्यायाधीश शालिनी शर्मा ने फैसला सुनाते हुए मुलताई नगर पालिका के अध्यक्ष का चुनाव शून्य कर दिया। बैतूल कलेक्टर को आदेश दिए गए हैं कि एक माह में मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव फिर से कराएं ।
अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय ने मीडिया को बताया कि विचारण के दौरान न्यायालय ने अध्यक्ष पद के लिए डाले गए छह मतों को अवैध पाया है इसी आधार पर चुनाव को शून्य किया गया है। वर्षा गढेकर की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में पार्षदों के द्वारा मतपत्र पर निशान लगाकर पहचान करते हुए मत डाले गए हैं। चुनाव में गड़बड़ी होने के कारण उन्होंने चुनाव को अवैध घोषित करने का आग्रह किया था।मुलताई नगर पालिका के चुनाव में भाजपा से बगावत कर पार्षद नीतू प्रहलाद परमार कांग्रेस समर्थन से अध्यक्ष बन गईं थीं। नीतू को भाजपा के तीन पार्षद द्वारा क्रास वोटिंग कर अध्यक्ष बना दिया जबकि भाजपा की अध्यक्ष पद की घोषित उम्मीदवार वर्षा गढ़ेकर को मात्र छह वोट मिले थे। भाजपा से बगावत कर अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने वाली नीतू प्रहलाद परमार को नौ मत मिले थे और वे अध्यक्ष निर्वाचित घोषित कर दी गईं थी।

भाजपा ने इस बगावत के बाद नीतू परमार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। एक मार्च 2023 को नगर पालिका अध्यक्ष नीतू परमार अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गईं थी। मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की ओर से वर्षा गढ़ेकर और पार्टी से बगावत कर नीतू परमार ने फार्म भरा था। कांग्रेस की ओर से वंदना साहू द्वारा फार्म भरा गया था किंतु कांग्रेस की वंदना साहू ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। कांग्रेस के पार्षदों ने भाजपा से बगावत करने वाली नीतू परमार को वोट दे दिए जबकि भाजपा के भी तीन पार्षदों ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को वोट न देकर बागी का समर्थन कर दिया इससे नीतू प्रह्लाद परमार कांग्रेस के समर्थन से अध्यक्ष बन गईं।




