किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे, ऋण वसूली की तारीख 30 अप्रैल तक बढ़े: निलय डागा।

गेहूं खरीदी शुरू नहीं, फिर भी ऋण जमा करने की मुनादी, 15 मार्च की डेडलाइन से किसान परेशान । कांग्रेस जिला अध्यक्ष का आरोप - किसानों पर कर्ज जमा करने का दबाव बना रही बैंक ।

बैतूल। जिले में इन दिनों किसानों के बीच एक अजीब विरोधाभास खड़ा हो गया है। एक तरफ खेतों में गेहूं की फसल कटने की तैयारी में खड़ी है, दूसरी ओर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बैतूल द्वारा ऋण वसूली के लिए मुनादी की जा रही है।

हालात ऐसे हैं कि अभी तक पूरे जिले में गेहूं खरीदी की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, लेकिन किसानों को बताया जा रहा है कि यदि उन्होंने 15 मार्च तक ऋण की राशि जमा नहीं की तो उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा।

इस पूरे घटनाक्रम पर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निलय डागा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह स्थिति किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि जब खेतों में खड़ी फसल की कटाई अभी शुरू ही हुई है और जिले में गेहूं खरीदी का काम भी शुरू नहीं हुआ है, तब किसानों से 15 मार्च तक ऋण जमा करने का दबाव बनाना पूरी तरह से अव्यवहारिक और किसान विरोधी कदम है।

श्री डागा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार और उसकी व्यवस्था किसानों की वास्तविक स्थिति को समझने के बजाय कागजी समय सीमा के पीछे भाग रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसान क पास अभी उपज का पैसा ही नहीं आया, तो वह ऋण कैसे चुकाएगा।

– इधर कर्ज की मुनादी, उधर खेतों में खड़ी है फसल

कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने बताया कि शहर में लाउडस्पीकर के माध्यम से ऋण वसूली के लिए प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जिला बैतूल के माध्यम से ऋणी किसानों को सार्वजनिक रूप से यह सूचना दी जा रही है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना ऋण जमा करें, तभी उन्हें शासन से मिलने वाली योजनाओं का लाभ मिल पाएगा। साथ ही यह भी चेतावनी दी जा रही है कि यदि समय पर ऋण वसूली जमा नहीं की गई तो भविष्य में कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। किसानों से यह भी कहा जा रहा है कि तत्काल वसूली जमा कर खाद-बीज ऋण की राशि प्राप्त करें।

– 30 अप्रैल तक बढ़ाई जाए ऋण वसूली की अंतिम तिथि

निलय डागा ने मांग करते हुए कहा कि ऋण वसूली की अंतिम तिथि कम से कम 30 अप्रैल तक बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने और आर्थिक रूप से व्यवस्थित होने का समय मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसानों का सम्मान करती है तो उसकी जमीनी हालात को देखते हुए तत्काल निर्णय लेना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को योजनाओं के लाभ से वंचित करने की चेतावनी देना और शहर में लाउडस्पीकर से वसूली की मुनादी कराना एक तरह से किसानों को सार्वजनिक दबाव में लाने जैसा है, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।

श्री डागा ने कहा कि किसान पहले ही महंगाई, लागत और बाजार की अनिश्चितता से जूझ रहा है। ऐसे समय में कर्ज वसूली की जल्दबाजी किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी है।

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