74 हजार हेक्टेयर आदिवासी भूमि पर कब्जे का आरोप, जयस बोला- कानूनों की हो रही अनदेखी।

बैतूल में सामुदायिक वन अधिकार लागू नहीं करने पर भड़का जयस, सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी। 455 गांवों की जमीन को लेकर संघर्ष, अनिश्चितकालीन धरने का किया ऐलान।

बैतूल। जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने राज्य सरकार, वन विभाग और राजस्व अधिकारियों पर संवैधानिक प्रावधानों, वन अधिकार कानून और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर आदिवासियों को जमीन से बेदखल करने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। जयस ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं रुकी तो संगठन दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेगा।

जयस के नर्मदापुरम् संभाग अध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष अधिवक्ता संदीप कुमार धुर्वे ने जारी बयान में कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय टास्कफोर्स कमेटी में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचारकों और प्रचारकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर आदिवासियों को भूमि से हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में संवैधानिक, वैधानिक प्रावधानों और न्यायालयीन आदेशों को पूरी तरह दरकिनार किया जा रहा है।

संगठन के अनुसार बैतूल जिले के 455 राजस्व ग्रामों की 74031.853 हेक्टेयर भूमि, जो भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 237(1) के तहत आरक्षित भूमि है, उसे वन विभाग ने वर्किंग प्लान में दर्ज कर कब्जे में ले लिया है। वहीं अनुविभागीय अधिकारी बैतूल, मुलताई और भैंसदेही द्वारा भू-राजस्व संहिता के अध्याय-18 का उल्लंघन करते हुए इन जमीनों को आरक्षित वन घोषित करने की जांच की जा रही है। जयस का आरोप है कि ग्रामवार लगाई गई आपत्तियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

जयस ने यह भी कहा कि आयुक्त आदिवासी विकास द्वारा 16 अप्रैल 2015 को जारी आदेश के अनुसार इन जमीनों पर आदिवासी समाज को सामुदायिक वन अधिकार दिए जाने की प्रक्रिया शुरू ही नहीं की गई। संगठन का आरोप है कि इन्हीं जमीनों को बिगड़े वन बताकर उद्योगपतियों को लीज पर देने की तैयारी की जा रही है ताकि ग्रामवासियों को मजदूर बनने के लिए मजबूर किया जा सके।

संगठन ने आरोप लगाया कि जिले में वर्किंग प्लान में दर्ज 74031.853 हेक्टेयर भूमि के अलावा राजस्व अभिलेखों में जंगल मद और गैर जंगल मद में दर्ज जमीनों को भी राजस्व विभाग द्वारा 12 दिसंबर 1996 के राजस्व अदालत आदेश और धारा 237(3) का उल्लंघन कर वन विभाग को आवंटित किया जा रहा है। साथ ही वन मित्र पोर्टल पर किए गए दावों से संबंधित कार्यवाहियों को भी राजस्व और वन अधिकारियों द्वारा अमान्य किया जा रहा है।

जयस नेता महेश उइके ने कहा कि बैतूल जिले में लगातार सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसे लेकर संगठन अब दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने पर विचार कर रहा है।

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