मुख्यमंत्री की सभा में ताप्ती ट्रस्ट पर हो सकती है घोषणा ।

ट्रस्ट बनने पर बदलेगी पवित्र नगरी की तस्वीर । नगरपालिका मुलताई के सीएमओ ने कलेक्टर को लिखा पत्र।

बैतूल। पवित्र नगरी मुलताई को 17 वर्षों से जिस ताप्ती ट्रस्ट के गठन का इंतजार है, वह अब जल्द साकार हो सकता है। 28 जून को मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कुकरू प्रवास को लेकर जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। बैतूल को नगर निगम का दर्जा दिए जाने की संभावित घोषणा के साथ ही मुलताई के लिए बहुप्रतीक्षित ताप्ती ट्रस्ट के गठन की घोषणा भी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि शासन अथवा प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ताप्ती ट्रस्ट गठन को लेकर चर्चाओं के पीछे हाल ही में नगरपालिका परिषद मुलताई की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी वीरेंद्र तिवारी ने कलेक्टर बैतूल को पत्र लिखकर पवित्र नगरी के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विकास को गति देने के लिए ताप्ती ट्रस्ट के गठन की मांग की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2009 में मध्यप्रदेश शासन ने मुलताई को पवित्र नगरी घोषित किया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक ट्रस्ट का गठन नहीं हो सका, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास की संभावनाएं अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाईं।

– 35 प्राचीन मंदिरों को मिल चुका है राजस्व अभिलेखों में स्थान

नगरपालिका द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में बताया गया है कि श्री क्षेत्र ताप्ती उद्गम स्थल पर स्थित प्राचीन मंदिरों का संयुक्त रूप से राजस्व विभाग और नगरपालिका परिषद ने चिन्हांकन कराया था। इसके उपरांत राजस्व विभाग ने आदेश जारी कर मां ताप्ती मंदिर सहित कुल 35 प्राचीन मंदिरों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर लिया है। मां ताप्ती उद्गम सरोवर, विभिन्न धार्मिक कुंडों तथा ताप्ती नदी के प्रवाह क्षेत्र का भी सीमांकन कर विधिवत अभिलेखीकरण किया जा चुका है।

– शासकीय ट्रस्ट गठन का दिया गया है प्रस्ताव

नगरपालिका ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्तमान में इन धार्मिक परिसंपत्तियों का स्वामित्व कलेक्टर बैतूल के नाम सर्वराकार के रूप में दर्ज है। ऐसी स्थिति में मध्यप्रदेश लोक न्यास अधिनियम 1951 के प्रावधानों के तहत एक शासकीय ट्रस्ट गठित किया जाना आवश्यक है। प्रस्ताव में “मां ताप्ती मंदिर समिति” नाम से ट्रस्ट का गठन कर मंदिरों, उद्गम स्थल और सम्पूर्ण तीर्थ क्षेत्र के संरक्षण, प्रबंधन तथा सुव्यवस्थित विकास का सुझाव दिया गया है। इसके साथ राजपत्र की प्रति, 35 मंदिरों की सूची, खसरा प्रतियां तथा ताप्ती नदी सीमांकन रिपोर्ट भी संलग्न की गई हैं।

– मुख्यमंत्री के दौरे से जुड़ीं नई उम्मीदें

नगरपालिका की पहल के बाद अब क्षेत्रवासियों की निगाहें 28 जून को मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कुकरू दौरे पर टिक गई हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि बैतूल को नगर निगम बनाने की संभावित घोषणा के साथ धार्मिक आस्था और पर्यटन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए जा सकते हैं। इन्हीं चर्चाओं के बीच ताप्ती ट्रस्ट गठन को लेकर उम्मीदों को नया बल मिला है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल कोई संकेत नहीं दिए गए हैं, लेकिन लंबे समय से लंबित इस मांग पर सकारात्मक निर्णय होने की संभावना से मुलताई और ताप्ती भक्तों में उत्साह का माहौल है।

– मुलताई के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि ताप्ती ट्रस्ट का गठन होता है तो यह मुलताई के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगी। इससे मां ताप्ती उद्गम क्षेत्र के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के कार्यों को गति मिलेगी, मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार होगा तथा धार्मिक पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसर भी विकसित हो सकेंगे। 17 वर्षों से लंबित यह मांग पूरी होने पर पवित्र नगरी मुलताई के विकास को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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