सावंगी में 21 लाख मंत्रों के साथ मां बगलामुखी साधना पूर्ण, नवरात्रि में जारी विशेष अनुष्ठान।
आचार्य रविन्द्र मानकर ने पूरे किए 21 पुरश्चरण, 36 अक्षरी महामंत्र की दुर्लभ साधना । 11 हजार मंत्रों का सामूहिक अनुष्ठान जारी।

बैतूल। सावंगी स्थित मां बगलामुखी पीठ पर एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक उपलब्धि सामने आई है। पीठाधीश्वर आचार्य रविन्द्र मानकर ने अपने सद्गुरु डॉ. सत्यनारायण गिरी गोस्वामी महाराज (सिवनी) के सानिध्य में मां बगलामुखी के 36 अक्षरी महामंत्र के 21 पुरश्चरण सफलतापूर्वक पूर्ण किए हैं। यह साधना करीब 21 लाख मंत्र जप के साथ संपन्न हुई, जिसे अत्यंत दुर्लभ और उच्च कोटि की साधना माना जा रहा है।
आचार्य मानकर के अनुसार यह साधना देवऋषि नारद की परंपरा पर आधारित है, जिसमें ऋषि नारद, छंद त्रिष्टुप, देवता श्री बगलामुखी, बीज ह्रीं और शक्ति स्वाहा मानी गई है। उन्होंने बताया कि यह मंत्र अत्यंत प्रभावशाली है और इसका जप केवल अनुशासन, संयम और गुरु मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिए।
सावंगी पीठ पर दो दर्जन से अधिक साधक-साधिकाएं आचार्य मानकर के सानिध्य में 11 हजार मंत्रों के लघु पुरश्चरण अनुष्ठान कर रहे हैं। इस दौरान विधि-विधान से पूजन, जप, हवन और पूर्णाहुति की जा रही है।
आचार्य के अनुसार पूर्ण पुरश्चरण के लिए सवा लाख मंत्र जप का विधान है, जबकि सामान्य साधक 11 हजार से 51 हजार मंत्रों तक लघु पुरश्चरण कर सकते हैं। इस साधना से शत्रु बाधा से मुक्ति, विजय, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। देवी बगलामुखी दश महाविद्या में प्रमुख मानी जाती हैं, जिनकी साधना तंत्र-मंत्र बाधा निवारण, मान-प्रतिष्ठा वृद्धि और रोग निवारण के लिए विशेष रूप से की जाती है।
अनुष्ठान की पूर्णाहुति पर बैतूल जिले सहित देश में सुख-समृद्धि, शांति और उन्नति की कामना की गई। साधना के प्रभाव को लेकर यह भी बताया गया कि मंत्र जप से एकाग्रता बढ़ती है, तनाव कम होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। नियमित जप से मानसिक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है, जिससे व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता और आत्मबल मजबूत होता है।




