यूजीसी विनियम लागू करने और जाति प्रमाण पत्रों की जांच की मांग

युवा आदिवासी विकास संगठन ने डिप्टी कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

गैर आदिवासियों को जारी जाति प्रमाण पत्रों की जांच की मांग

रानी दुर्गावती प्रांगण में बैठक, कार्यकारिणी का हुआ विस्तार

बैतूल। यूजीसी विनियम 2026 को शीघ्र लागू करने और मुलताई-आमला क्षेत्र में जारी गोंड/गायकी जाति प्रमाण पत्रों की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर युवा आदिवासी विकास संगठन ने जोरदार आवाज उठाई।

युवा आदिवासी विकास संगठन के जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह इवने और संरक्षक रामचरण इरपाचे के नेतृत्व में डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर संगठन ने आदिवासी हितों की सुरक्षा और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की। डॉ. प्रदीप उइके और जनपद उपाध्यक्ष ज्ञान सिंह परते ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा और शिक्षा व भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना संगठन की प्राथमिकता है, इसके लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।

इससे पूर्व रानी दुर्गावती प्रांगण ऑडिटोरियम बैतूल में संगठन की बैठक आयोजित की गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते हुए कार्यकारिणी का विस्तार किया गया।

बैठक के बाद संगठन प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से धर्मेन्द्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर के माध्यम से प्रेषित किया। ज्ञापन में 15 जनवरी को जारी यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम 2026 को शीघ्र लागू करने की मांग की गई। संगठन ने बताया कि इन विनियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान अथवा दिव्यांगता के आधार पर विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, महिलाओं तथा दिव्यांगजनों के विरुद्ध भेदभाव का उन्मूलन करना है। 29 जनवरी 2026 को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा लगाए गए स्थगन के बाद भी प्रभावी और जवाबदेह क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई गई।

संगठन ने एमपीपीएससी भर्ती प्रक्रिया में देरी, कम पद, कथित घोटालों और अपारदर्शिता पर चिंता जताते हुए वर्ष 2026 की भर्ती में 700 से अधिक पद बढ़ाने, पेपर लीक कानून लागू करने, समयबद्ध परीक्षा कराने, वर्ष 2019 से लंबित सभी भर्तियां पूर्ण करने तथा मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिका दिखाने की मांग रखी।

– गैर आदिवासियों को जनजाति अंतर्गत प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप

इसके अलावा बैतूल जिले के मुलताई एवं आमला में गैर आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति अंतर्गत गोंड/गायकी के जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाने का आरोप लगाते हुए सभी प्रमाण पत्रों की जांच कर निरस्त करने की मांग की गई। ज्ञापन में प्रकरण क्रमांक 4418/बी-121, जाति प्रमाण पत्र क्रमांक आर.एस./447/0104/19770/2025 धर्मेन्द्र खण्डाये पुत्र भन्गुलाल खण्डाग्रे, कमला खण्डाग्रे के नाम से जारी प्रमाण पत्र का उल्लेख कर इसे अवैध बताया गया।

बैठक में संगठन संस्थापक प्रदीप उइके, दिलीप धुर्वे, ज्ञान सिंह परते, राजकुमार उइके, जयचंद सरियाम, अविनाश धुर्वे, कानूलाल उइके, भारत कुमरे, रामकुमार कुमरे, सानू कवड़े, राहुल कासदे, रामदास उइके, सोनू धुर्वे, निमिष सरियाम, हेमराज, धनराज जावरकर, वासुदेव परते, लोकेश भलावी, छोटेलाल परते, अंकित कुमरे, मुकेश मर्सकोले, मनोज कुमरे सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

– नई कार्यकारिणी गठित

संगठन की नई कार्यकारिणी में तुलसी उइके को बैतूल ब्लॉक अध्यक्ष, रामशंकर पंद्राम को भीमपुर ब्लॉक अध्यक्ष, अमरचंद मर्सकोले को आमला ब्लॉक अध्यक्ष, सुभाष उइके को शाहपुर ब्लॉक अध्यक्ष, सुनील कवड़े बैतूल को जिला महासचिव व सुनील कवड़े गुड़ी को जिला संगठन मंत्री, कमलेश मर्सकोले को जिला उपाध्यक्ष, उमेश परते को बैतूल ब्लॉक उपाध्यक्ष तथा आशीष उइके को बैतूल ब्लॉक महासचिव नियुक्त किया गया।

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