Kheti Kisani News: गन्ने की भरपूर पैदावार और कचरे को खत्म करने का देसी जुगाड़
Betul News:Desi jugaad for abundant production of sugarcane and elimination of waste

Today Betul Kheti News: बैतूूल। गन्ना एक ऐसी फसल है जो प्राकृतिक आपदा या मौसम कितना भी खराब क्यों न हो जाए, किसान को लागत से अधिक दाम दे ही देती है। यही कारण है कि अब किसान परंपरागत गेहूं, साेयाबीन, मक्का, ज्वार की फसलों की जगह गन्ना की खेती की ओर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
बैतूल जिले में शुगर मिल खुलने और बाहर से गुड़ बनाने के लिए आने वालों की वजह से किसान गन्ना की फसल की कटाई और उसे बेचने की परेशानी से भी मुक्त हो रहे हैं। किसानाें के सामने अब गन्ना की फसल में लागत कम करने की ही बड़ी चुनौती है ताकि अधिक मुनाफा ले सकें। गन्ना की खेती में खरपतवार को खत्म करना किसान के लिए सबसे खर्चीला हो रहा है। ऐसे में एक किसान ने देसी जुगाड़ बना लिया है। इससे जहां खरपतवार का सफाया हो जाता है वहीं गन्ने की पुरानी जड़ें टूट जाती हैं और मिट्टी भुरभुरी हो जाती है जिससे नई जड़ों को विस्तार करने में अधिक समय नहीं लगता है।
हनोतिया गांव के किसान संदीप चौधरी ने बताया कि जिस तरह बुजुर्गों के द्वारा गन्ने की कतार के बीच की नाली में हल चलाकर गन्ने की पुरानी जड़ों को तोड़ने का काम किया जाता था उसी तरह से पुराने कल्टीवेटर का जुगाड़ कर हल का रूप दे दिया गया है।
एक कतार में तीन हल चल सकें इसकी व्यवस्था बनाई गई है। एक साथ दो कतारों में ट्रैक्टर की मदद से हल से कहीं बेहतर जुताई की जा सकती है। इससे कतार के बीच की नालियों में उग चुका कचरा उखड़कर नष्ट हो जाता है वहीं जड़ों तक हवा और भुरभुरी मिट्टी भी पहुंच जाती है। बेहद कम समय और कम खर्च में गन्ने के खेत में जुताई कर खरपतवार का सफाया किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि गन्ने की कटाई करने के एक माह बाद एक बार जुताई कर दी जाती है। इसके करीब डेढ़ महीने बाद एक बार और जुताई कर देने से खरपतवार का 90 प्रतिशत तक सफाया हो जाता है। गन्ने की कतार में ही कुछ कचरा बच जाता है जिसे किसान मजदूराें की मदद से या फिर रासायनिक दवा का उपयोग कर कम खर्च में खत्म कर सकते हैं।
किसान चौधरी ने बताया कि जब यह देसी जुगाड़ तैयार किया तो कई किसान उसे देखने के लिए पहुंचते हैं और कई तो उपयोग करने के लिए लेकर भी जाते हैं। इन दिनों किसान गन्ना कटाई के बाद नई फसल तैयार करने के लिए जुटे हैं। इस बार अप्रैल माह में वर्षा हो जाने से गन्ने की फसल बेहतर है।




