Strict warning given to shopkeepers against child labour: प्रदीपन ने एक साल में 26 बच्चों को बालश्रम से दिलाई आज़ादी
विश्व बालश्रम निषेध दिवस पर 100 बच्चों को मजदूरी से छुड़ाया, जिले में चलाया बड़ा अभियान

बालश्रम के खिलाफ दुकानदारों को दी गई सख्त चेतावनी
जस्ट राइट नेटवर्क और प्रदीपन की बड़ी भूमिका
बैतूल। जिले को बालश्रम मुक्त बनाने के लिए एक संगठित और प्रभावशाली अभियान की शुरुआत हो चुकी है। विश्व बालश्रम निषेध दिवस के अवसर पर जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर सक्रिय नागरिक संगठन प्रदीपन ने श्रम विभाग, पुलिस विभाग और टास्क फोर्स के साथ मिलकर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। जिले के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी कर 100 बालश्रमिक बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया।
इस मौके पर प्रदीपन संस्था की डायरेक्टर रेखा गुजरे ने बताया कि पिछले एक वर्ष में जिला प्रशासन के सहयोग से बालश्रम के खिलाफ अभियान चलाकर 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। आज की कार्रवाई में भी अनेक होटलों, ढाबों, मोटर गैराज, ईंटभट्टों और दुकानों पर छापा मारा गया। दुकानदारों को चेतावनी दी गई कि यदि वे 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से मजदूरी कराते पाए गए तो बालश्रम प्रतिषेध अधिनियम के तहत उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
– दुकानों पर स्पष्ट रूप से बोर्ड लगाने के निर्देश
जिला मुख्यालय पर भी गुरुवार को बालश्रम उन्मूलन अभियान संचालित किया गया। दुकानदारों को निर्देश दिए गए कि वे अपनी दुकानों पर स्पष्ट रूप से यह बोर्ड लगाएं कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कार्य पर नहीं रखा जाता। टास्क फोर्स टीम ने यह सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण किया और समझाइश भी दी।
प्रदीपन संस्था देश के सबसे बड़े नागरिक समाज नेटवर्क जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन (जेआरसी) की सहयोगी है। यह नेटवर्क देश के 418 जिलों में सक्रिय है और बाल मजदूरी, बाल विवाह, बाल शोषण व तस्करी के खिलाफ ज़मीन पर काम कर रहा है। जेआरसी के सहयोग से पिछले दो वर्षों में 85 हजार से अधिक बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया है और 54 हजार से ज्यादा मामलों में कानूनी कार्रवाई की गई है।
– बैतूल जिले में अब तक 32 बच्चों को बाल मजदूरी से छुड़ाया
रेखा गुजरे ने कहा कि भारत ने इस दिशा में अन्य देशों के मुकाबले बेहतर कार्य किया है और इसका श्रेय राज्य सरकार और जिला प्रशासन की सतर्कता और संवेदनशीलता को जाता है। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक बैतूल जिले में 32 बच्चों को बाल मजदूरी से छुड़ाया गया है और उनके पुनर्वास की दिशा में लगातार कार्य जारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि बाल मजदूरी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए पुख्ता नीतियां बनानी होंगी जैसे कि सरकारी खरीद में बालश्रम का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित किया जाए, 18 वर्ष तक की उम्र के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित की जाए, बाल मजदूर पुनर्वास कोष की स्थापना की जाए और खतरनाक उद्योगों की सूची में विस्तार किया जाए।
– अभियान में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका
ऊर्जा स्ट्राइक फॉर चिल्ड्रन के राष्ट्रीय संयोजक रविकांत ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के कन्वेंशन 182 का हस्ताक्षरकर्ता देश है और उसने खतरनाक बाल श्रम को समाप्त करने की प्रतिबद्धता ली है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए यह ज़रूरी है कि बालश्रम मुक्त आपूर्ति श्रृंखला, कौशल विकास और शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए। इस अभियान की सफलता में प्रदीपन के कोऑर्डिनेटर सुनील कुमार, सोशल वर्कर पुनम अतुलकर, चारूलता वर्मा, अलका नागले, ज्योति बागवे, विशाल आर्य, रवि चवारे और राकेश मन्नासे का अहम योगदान रहा। बैतूल जल्द ही बालश्रम मुक्त जिले के रूप में स्थापित हो, इसके लिए नागरिक संगठन और जिला प्रशासन मिलकर सशक्त प्रयास कर रहे हैं।




