अहंकार से बचे, कोई व्यक्ति निस्वार्थ भाव से सही सलाह दे रहा है तो उसकी बातें माने,: देवी चंद्रमुखी

बैतूल। पाथाखेड़ा के वीर कुंवर सिंह नगर में चल रही शिव महापुराण कथा में तीसरे दिन कथावाचक देवी चंद्रमुखी ने बताया कि इस सृष्टि के रचयिता भगवान शिव ही इसे संचालित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भगवान का नाम लेता है, उसके आगे दुनिया झुक जाती है। इसलिए हमें निरंतर भगवान का नाम लेते रहना चाहिए।
देवी चंद्रमुखी ने आगे बताया कि हमें उन लोगों की पहचान करनी चाहिए जो हमें निस्वार्थ भाव से सही सलाह देते हैं। उनकी बातों को नजरअंदाज करना हमारे लिए नुकसानदायक हो सकता है। कथा में उन्होंने नारद मुनि और कामदेव के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि नारद मुनि ने जब कामदेव को पराजित किया तो उन्हें घमंड हो गया। वे इस बात की प्रशंसा स्वयं कर रहे थे। उत्साह में वह कैलाश पर्वत पहुंचे और शिवजी से अपनी जीत का बखान किया।
शिवजी ने उन्हें यह चेतावनी दी कि घमंड करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर तुमने कामदेव को पराजित किया है तो यह अच्छी बात है, लेकिन अहंकार नहीं करना चाहिए। शिवजी ने नारद मुनि से कहा कि विष्णु जी से इस बात का उल्लेख मत करना। नारद मुनि ने शिवजी की सलाह को नजरअंदाज कर दिया, जिसका परिणाम यह हुआ कि विष्णु जी ने उनके अहंकार को समाप्त किया। कथा से प्रेरणा लेते हुए देवी चंद्रमुखी ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति निस्वार्थ भाव से सही सलाह दे रहा है तो हमें उसकी बात को मान लेना चाहिए और अहंकार से बचना चाहिए। इस अवसर पर ब्रजकिशोर पवार, खुशीलाल पवार, सुभाष पवार, राजा पवार, महेंद्र पवार, सतीष खंडाग्रे, सानू सोनारिया सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के दौरान भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा।





