Air Pollution : बैतूल में गुड़ घानों से फैल रहा वायु प्रदूषण, टीम ने किया निरीक्षण

एनजीटी के निर्देश पर चार सदस्यीय टीम ने बैतूल एवं आमला में चल रहे गुड़ कारखानों पर यंत्र लगाकर की जांच

Air Pollution : बैतूल। जिले में बड़े पैमाने पर खुल गए गुड़ घानों से वायु प्रदूषण फैल रहा है। इससे जिले की वायु गुणवत्ता भी खासी प्रभावित हो रही है। गुड़ बनाने के घाने, कोल्हू से फैल रहे वायु प्रदूषण के संबंध में एनजीटी के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने बैतूल जिले के आमला एवं बैतूल विकासखंड में गुड़ घानों, कोल्हू पर पहुंचकर उपकरणाें की मदद से प्रदूषण की मात्रा का आंकलन किया। टीम ने पाया है कि गुड़ बनाने की इकाईयों से वायु प्रदूषण तेजी से फैल रहा है और जिले की वायु गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। चार सदस्यों की टीम ने दो दिन तक निरीक्षण किया है। जिसकी रिपोर्ट भोपाल कार्यालय में प्रस्तुत की जाएगी।

गुड़ घानों, कोल्हू से फैल रहे वायु प्रदूषण की जांच करने के लिए भोपाल से विज्ञानी एयू बेग के नेतृत्व में क्षेत्रीय कार्यालय छिंदवाड़ा के केमिस्ट संजय राजपूत, अजय देशमुख एवं शुभम चौबितकर ने चिन्हित गुड़ घानों पर पीएम 10 एवं पीएम 2.5 उपकरण स्थापित किए और प्रदूषण की मात्रा का आंकलन किया। इसे अपनी रिपोर्ट में दर्ज करने के बाद निरीक्षण प्रतिवेदन एवं पंचनामा तैयार किया गया। टीम ने मौके पर पाया कि गुड़ बनाने के लिए जलाए जा रहे ईंधन से कार्बन एवं अन्य गैस वातावरण में बड़ी मात्रा में पहुंच रही हैं। इससे वायु गुणवत्ता पर असर हो रहा है।

टीम में शामिल क्षेत्रीय कार्यालय छिंदवाड़ा के केमिस्ट संजय राजपूत ने बताया कि एनजीटी ने आठ नवंबर को जो आदेश दिया है उसके परिपालन में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा गुड़ घानों, कोल्हू एवं गुड़ बनाने वाली इकाईयों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। आमला एवं बैतूल में बड़ी संख्या में गुड़ बनाने की इकाईयाें का संचालन किया जा रहा है। इसमें हमने भूमि स्वामी, गुड़ बनाने वाले ठेकेदारों की पूरी जानकारी भी लेकर पंचनामा तैयार कर लिया है। उत्सर्जन मानकों की जांच की गई।

गुड़ उत्पादन में उपयोग होने वाले भट्टों से निकलने वाला धुआं और अन्य उत्सर्जन पर्यावरण पर प्रभाव डाल सकता है। गुड़ उत्पादन में गन्ने के अवशेष और अन्य ठोस कचरे का प्रबंधन सही तरीके से किया जा रहा है या नहीं, इसकी जांच की गई। उत्पादन प्रक्रिया में पानी का अत्यधिक उपयोग हो रहा हो या दूषित जल बहाया जा रहा हो, तो इसे नियंत्रित करने की आवश्यकता होती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button