Betul news: बैतूल में जनजातीय गौरव दिवस पर विशाल आयोजन, उमड़ा जनसैलाब

बैतूल। पुलिस ग्राउंड पर सर्व जनजातीय समाज द्वारा जनजातीय गौरव दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के दूर-दराज के गांवों से जनजातीय समाज का विशाल जनसमूह उमड़ा। आयोजन में जनजातीय समाज की संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें डंडार नृत्य, गदली नृत्य, गोंडी और कोरकू गीतों पर बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं। भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित नाट्य मंचन का निर्देशन सोनू ने किया, जो कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा।
कार्यक्रम में प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें जनजातीय समाज के क्रांतिकारियों के जीवन और उनके योगदान को विस्तार से दर्शाया गया। प्रदर्शनी ने जनजातीय समाज के इतिहास और संस्कृति को उजागर किया। कार्यक्रम में जनजातीय मंत्रणा परिषद के सदस्य डॉ. रूपनारायण मांडावे, लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त सचिव पी. सी. बारस्कर और समाजसेवी नन्हे सिंह उईके विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
समिति द्वारा पिछले दो महीनों से जनजागरण अभियान चलाया जा रहा था, जिसमें भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और उनके राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के लिए किए गए संघर्ष को जन-जन तक पहुंचाया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समाज को उनकी सनातन संस्कृति से जोड़ना, राष्ट्रीय अखंडता और सामाजिक समरसता बनाए रखना और जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को स्मरण कराना है।
समिति के सदस्यों ने कहा कि विभाजनकारी शक्तियां जो राजनीतिक स्वार्थ के चलते समाज को भ्रमित करती हैं, उनसे जनजातीय समाज को सचेत करना और धर्म, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा करना इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है। समिति जनजातीय समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य, नशामुक्ति, स्वरोजगार, कुटीर उद्योगों के विकास, मतांतरण और लैंड जिहाद के प्रयासों के खिलाफ जनजागृति फैलाने के लिए लगातार कार्य करेगी।
मुख्य वक्ता डॉ. रूपनारायण मांडावे ने अपने संबोधन में कहा कि भारत देश सदियों से विदेशी आक्रांताओं से संघर्ष करता रहा है और इन संघर्षों में जनजातीय समाज का योगदान अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि त्रेता युग में रामराज्य की स्थापना से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक जनजातीय समाज ने अपनी विशिष्ट भूमिका निभाई है। चाहे वह बिरसा मुंडा, रानी दुर्गावती, टंट्या मामा, सरदार विष्णु सिंह गोंड, सरदार गंजन सिंह कोरकू, रामजी गोंड, रानी कमलापति, शहीद कौवा गोंड, दादा जंगु सिंह उइके जैसे क्रांतिकारी हों, सभी ने मातृभूमि और धर्म-संस्कृति की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया।
कार्यक्रम में सभी समाज के संगठनों ने सक्रिय सहयोग दिया। उन्होंने जनजातीय समाज के प्रतिभागियों का स्वागत किया और भोजन व्यवस्था उपलब्ध कराई। जिले के सभी जनजातीय समाज के समाजसेवियों और कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया।





