Betul news: गौ सांसद युवराज मालवीय श्री गौड़ का बांग्लादेश क्रिकेट टीम के खिलाफ विरोध, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के विरोध में बांग्लादेशी क्रिकेट टीम के बहिष्कार की मांग

बैतूल। गौ सांसद युवराज मालवीय श्री गौड़ ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों और उनके नरसंहार के खिलाफ कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन पूज्यश्री शंकराचार्य जी के निर्देशन पर गौ संसद-सह सचिव देवेन्द्र पाण्डेय द्वारा जारी किया गया, जिसमें बांग्लादेश से आने वाली क्रिकेट टीम का पुरजोर विरोध करते हुए कहा गया कि ऐसे देश की टीम को भारत की पवित्र भूमि पर खेलने का मौका देना हिंदू समाज का अपमान है।
ज्ञापन में गौ सांसद युवराज मालवीय श्री गौड़ ने कलेक्टर से मांग की कि जब तक बांग्लादेश क्रिकेट टीम अपने देश में हो रहे हिंदुओं के खिलाफ अत्याचारों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगती, तब तक उन्हें भारत में खेलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इस मौके पर सागर करकरे, कमलेश प्रजापति, विशाल बौरासे, राकेश मालवीय, शिव नामदेव, संतोष, नितिन आर्य, मधु देवहरे, दीपक गावंडे, अमन खातरकर, विवेक गुबरेले सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।
हिंदू प्रताड़ना पर बांग्लादेशी क्रिकेट टीम का मौन
ज्ञापन में कहा गया कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के दौरान हिंदू समाज पर अत्याचार किए गए। वहां के हिंदू भाइयों, बहनों, बच्चों और वृद्धों पर बर्बरतापूर्वक अत्याचार, बलात्कार और हत्या का तांडव हुआ, परंतु बांग्लादेश के किसी भी नेता, खिलाड़ी, या अन्य हस्ती ने इन अमानवीय घटनाओं की निंदा नहीं की। इस चुप्पी से भारतीय हिंदू समाज आहत है, और बांग्लादेश क्रिकेट टीम का भारत में स्वागत इस आघात को और गहरा करता है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि भारत ने हमेशा सर्वधर्म सद्भाव की नीति अपनाई है, जिसमें सभी धर्मों का सम्मान किया गया है। भारत ने कभी किसी विदेशी पंथ को अपमानित नहीं किया, बल्कि संकट के समय उनकी मदद भी की है। इस संदर्भ में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना का उदाहरण दिया गया, जिन्हें सत्ता संकट के दौरान भारत ने शरण दी थी।
बांग्लादेशी क्रिकेट टीम के खेल का विरोध
गौ सांसद युवराज मालवीय श्री गौड़ ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि जिस देश में हिंदुओं पर खुलेआम अत्याचार हो रहे हों, वहां के खिलाड़ियों का भारत में सम्मानपूर्वक क्रिकेट खेलना भारतीय हिंदू समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी खिलाड़ियों को तब तक भारत में क्रिकेट खेलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जब तक वे अपने देश में हिंदुओं के साथ हुए अत्याचारों के लिए माफी नहीं मांगते। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि बांग्लादेशी क्रिकेट टीम का भारत में खेलना हिंदू समाज के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। इस कारण से उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री और भारतीय क्रिकेट बोर्ड से अनुरोध किया है कि बांग्लादेश क्रिकेट टीम को भारत में खेल के लिए आमंत्रित न किया जाए, जब तक वे अपने देश के हिंदू समाज पर हो रहे अत्याचारों के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाते।




