Unified Pension Scheme: यूनिफाइड पेंशन स्कीम के खिलाफ बैतूल में विरोध की लहर, सभी विभागों के कर्मचारी शामिल
जिलाध्यक्ष रवि सरनेकर के नेतृत्व में शिक्षकों ने किया प्रदर्शन, एनपीएस से भी खराब है यूनिफाइड पेंशन स्कीम

Unified Pension Scheme: बैतूल। जिले में आज 3 सितंबर को शिक्षकों ने एनपीएस (नेशनल पेंशन स्कीम) और यूपीएस (यूनिफाइड पेंशन स्कीम) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि एनपीएस से भी खराब यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) को लागू करना उनकी आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार पुरानी पेंशन स्कीम (ओपीएस) को बहाल करे, जिससे वेवानिवृत्ति के बाद उनकी वित्तीय स्थिति सुरक्षित हो सके।
जिलाध्यक्ष रवि सरनेकर ने बताया कि एनपीएस में पहले से ही कई खामियां थीं, जिसके चलते उनका भविष्य सुरक्षित नहीं था। अब, जब सरकार ने एनपीएस के स्थान पर यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू की है, तो स्थिति और भी गंभीर हो गई है। उनके अनुसार, यह नई योजना न केवल उनकी पेंशन को और अनिश्चित बनाती है, बल्कि उनकी वित्तीय सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।
रवि सरनेकर ने कहा कि शिक्षकों और कर्मचारियों का गुस्सा इस बात से है कि सरकार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि 2 से 6 सितंबर तक, मध्यप्रदेश के सभी विभागों के कर्मचारी अपने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर एनपीएस और यूपीएस का विरोध कर रहे हैं। काली पट्टी पहनने का यह कदम इस बात का प्रतीक है कि कर्मचारी सरकार की नई पेंशन योजना से बेहद असंतुष्ट हैं।
शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार नई पेंशन योजनाओं को लागू कर केवल अपने बजट को सुरक्षित करने की कोशिश कर रही है, जबकि कर्मचारियों के भविष्य के प्रति उदासीनता दिखा रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल नहीं करती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे और भी उग्र कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।
इस आंदोलन में सिर्फ शिक्षक ही नहीं, बल्कि अन्य विभागों के कर्मचारी भी शामिल हो रहे हैं। उन्होंने काली पट्टी बांधकर अपने असंतोष का प्रदर्शन किया और सरकार से पुरानी पेंशन स्कीम को तुरंत बहाल करने की मांग की। बैतूल के अलावा, पूरे मध्यप्रदेश में यह विरोध प्रदर्शन चल रहा है, जिससे यह मुद्दा राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।




