27 नवंबर को दुनिया मनाएगी बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक दिवस, 882 बाल विवाह रुकवाने वाले प्रदीपन ने जताई खुशी

बैतूल। भारत से शुरू हुई बाल विवाह के खिलाफ मुहिम को अब वैश्विक पहचान मिल गई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित किया है। बैतूल में बाल विवाह के खिलाफ जमीनी स्तर पर अभियान चला रहे प्रदीपन ने इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए इसे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के अथक प्रयासों को मिली वैश्विक मान्यता बताया है। प्रदीपन, जेआरसी का सहयोगी संगठन है और जेआरसी लंबे समय से बाल विवाह के खिलाफ अलग अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की मांग कर रहा था।
शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदीपन की निदेशक रेखा गुजरे ने कहा कि भारत से उठी आवाज आज पूरी दुनिया का संकल्प बन गई है। 27 नवंबर का दिन भारत के लिए भी गौरव का विषय है, क्योंकि 2024 में इसी दिन भारत सरकार ने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन सहित नागरिक समाज संगठनों के सहयोग से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शुरू किया था। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की घोषणा गौरव का विषय जरूर है, लेकिन अब रुकने का समय नहीं है। दुनिया के हर बच्चे को बाल विवाह मुक्त बचपन दिलाना अगली चुनौती है। जब तक जिले के किसी गांव में एक भी बच्चा बाल विवाह के डर में जी रहा है, तब तक लड़ाई अधूरी है।
रेखा गुजरे ने बताया कि बैतूल में सरकार और प्रशासन के साथ मिलकर कानूनी हस्तक्षेप के जरिए 882 बाल विवाह रुकवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि केवल कानून के भरोसे बाल विवाह पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। इसलिए स्कूलों, पंचायतों और गांवों में बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए गए। लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई गई, आर्थिक रूप से कमजोर और बाल विवाह की दृष्टि से संवेदनशील परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया तथा पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों का दोबारा स्कूलों में दाखिला कराया गया। धर्मगुरुओं और शिक्षकों को भी अभियान से जोड़कर इसे जन आंदोलन का स्वरूप दिया गया है।
बाल विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस की पहल जेआरसी के संस्थापक भुवन ऋभु ने की थी। मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कई वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में एक बार फिर इस दिवस की घोषणा के लिए प्रस्ताव लाने की बात कही थी। इस दौरान अफ्रीकी देश सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी डॉ. फातिमा मादा बायो भी मौजूद थीं और उन्होंने पहल का समर्थन किया। इसके बाद सिएरा लियोन ने भारत सहित 67 देशों के अनुमोदन वाला प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया। प्रस्ताव में 27 नवंबर को बाल विवाह समाप्त करने के लिए समर्पित वैश्विक दिवस घोषित करने की मांग की गई थी, जिसे 4 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र ने पारित कर दिया।
जेआरसी अपने सहयोगी संगठनों के साथ भारत के सभी 782 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहा है। सरकारों और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से समुदायों, स्कूलों, पंचायतों, आदिवासी और वंचित समुदायों, महिलाओं, पुलिसकर्मियों, धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों को इस मुहिम से जोड़ा गया है। जेआरसी के अनुसार उसके सहयोगी संगठनों ने देश में अब तक 5 लाख 50 हजार से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं। संगठन का कहना है कि सरकार, नागरिक समाज और समुदाय मिलकर काम करें तो बाल विवाह को रोका ही नहीं, बल्कि पूरी तरह समाप्त भी किया जा सकता है।
बाल विवाह की दर में भी कमी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-21) के अनुसार देश में 18 वर्ष से पहले 23.3 प्रतिशत लड़कियों की शादी हो चुकी थी। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 (2023-24) में यह आंकड़ा घटकर 20.1 प्रतिशत रह गया। भारत सरकार ने 2026 तक बाल विवाह की दर को 10 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा है। केंद्र और राज्य स्तर पर जारी प्रयासों के आधार पर 2026 के अंत तक यह दर 15 प्रतिशत से नीचे आने की उम्मीद जताई गई है। यह प्रयास 2030 तक बाल विवाह समाप्त करने की वैश्विक प्रतिबद्धता और सतत विकास लक्ष्य-5 के लक्ष्य 5.3 के अनुरूप है, जिसमें बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह जैसी हानिकारक प्रथाओं को समाप्त करने का संकल्प है।




