1.25 लाख शिक्षकों ने मिलकर जुटाए 1 करोड़, जुलाई में 4 दिवंगत शिक्षक परिवारों को मिले 25-25 लाख
शिक्षक कल्याण कोष के माध्यम से अब तक करीब 4 करोड़ की सहायता वितरित

बैतूल। प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक कल्याण कोष, मध्यप्रदेश ने दिवंगत शिक्षकों के परिवारों के लिए सहयोग की मिसाल पेश की है। प्रदेश के 1.25 लाख पंजीकृत शिक्षकों के सहयोग से जुलाई 2026 में चार दिवंगत शिक्षक परिवारों को कुल 1 करोड़ 8 लाख 1 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। कोष के संस्थापक सतीश खरे ने बताया कि 5 से 20 जुलाई के बीच यह राशि वितरित की गई। अब तक शिक्षक कल्याण कोष के माध्यम से दिवंगत शिक्षक परिवारों को करीब 4 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
जुलाई में श्योपुर के स्व. मुकेश दादौरिया के परिवार को 27.11 लाख रुपये, देवास के स्व. कमल बागड़िया के परिवार को 26.81 लाख रुपये, सिवनी के स्व. राजेन्द्र अवधिया के परिवार को 27.22 लाख रुपये तथा रायसेन के स्व. महेश बाबू जाटव के परिवार को 26.87 लाख रुपये प्रदान किए गए। चारों परिवारों को कुल 1 करोड़ 8 लाख 1 हजार रुपये की सहायता राशि वितरित की गई।
रवि सरनेकर औरजिला प्रभारी बैतूल कृष्णा कुमार देशमुख ने कहा कि वर्ष 2004 के बाद नियुक्त शिक्षकों को पुरानी पेंशन, ग्रेच्युटी और पारिवारिक पेंशन जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। उनका कहना है कि एनपीएस के तहत मिलने वाली पेंशन बेहद कम है, जिससे दिवंगत शिक्षकों के परिवारों का समुचित भरण-पोषण संभव नहीं हो पाता। उन्होंने एनपीएस समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की मांग दोहराई।
सतीश खरे ने कहा कि शिक्षक कल्याण कोष का मूल मंत्र कोई परिवार वंचित न रहे है। इसी भावना से प्रदेशभर के शिक्षक हर माह सहयोग कर रहे हैं, ताकि किसी भी दिवंगत शिक्षक के परिवार को आर्थिक संकट का अकेले सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि विधायक और सांसद अल्प अवधि के कार्यकाल के बाद भी आजीवन पेंशन और भत्ते प्राप्त करते हैं, जबकि पूरी सेवा देने वाले सरकारी कर्मचारियों को ऐसी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों की पेंशन व्यवस्था और उनकी योग्यता के निर्धारण पर भी सवाल उठाते हुए सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग की।




