जेएच कॉलेज में पर्यावरण एवं विकास विषय पर कार्यशाला आयोजित ।

विकास जरूरी, लेकिन संसाधनों का संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण: आईएफएस कन्हैया कुमार।

बैतूल। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय जयवंती हॉक्सर शासकीय महाविद्यालय बैतूल में पर्यावरण एवं विकास विषय पर आयोजित कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की आवश्यकता पर गंभीर मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने पर्यावरणीय चुनौतियों के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प भी लिया।

मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, विज्ञान भवन भोपाल के निर्देशानुसार प्राचार्य मीनाक्षी चौबे तथा वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अनीता सोनी के मार्गदर्शन में माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा 10 जून को कार्यशाला का आयोजन किया गया। माइक्रोबायोलॉजी एवं वनस्पति शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. अर्चना सोनारे के निर्देशन तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ. महेन्द्र नावंगे के संयोजन में कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन एवं वंदना से हुआ। अतिथियों का स्वागत पौधा भेंट कर किया गया।

मुख्य वक्ता दक्षिण बैतूल के आईएफएस अधिकारी कन्हैया कुमार ने पर्यावरण बनाम विकास विषय पर अपने सारगर्भित विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विकास देश की समृद्धि के लिए आवश्यक है, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संसाधनों के अंधाधुंध दोहन की बजाय संतुलन बनाए रखना समय की मांग है। उन्होंने कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग, सीमेंट रोड निर्माण और रेडिएशन जैसे कारकों को पर्यावरणीय असंतुलन के प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए। अधिक से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है।

– माइक्रोप्लास्टिक की बढ़ती मौजूदगी को चिंताजनक

कार्यक्रम में वनस्पति शास्त्र विभाग के डॉ. स्वप्निल यादव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भूगर्भ जल सीमित संसाधन है और इसकी शुद्धता बनाए रखना आज सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने भूगर्भ जल में माइक्रोप्लास्टिक की बढ़ती मौजूदगी को चिंताजनक बताते हुए इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराया।

कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय परिसर में पौधारोपण किया गया। आभार प्रदर्शन डॉ. स्वप्निल यादव ने किया। कार्यशाला में प्रो. अर्चना सोनारे, डॉ. अनीता सोनी, प्रो. सुनीता गड़ेकर, विनोद चौरासे, प्रो. नीतु कुमरे, डॉ. पंकज बारस्कर, डॉ. राहुल सिंह ठाकुर, डॉ. राजकुमार चौकिकर, डॉ. महेन्द्र कुमार मिश्रा, प्रो. अजय सिंह सिरसाम, डॉ. प्रीतिबाला एवं सतीश वाडिवा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का सराहनीय सहयोग रहा। कार्यक्रम ने पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार विकास के प्रति जागरूकता का प्रभावी संदेश दिया।

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