‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ गुरु घर टिकारी में मनाया गुरु रविदास जी का 649वां प्रकाश पर्व

न्यायप्रिय और भेदभाव मुक्त समाज का लिया संकल्प


बैतूल। गुरु घर टिकारी में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी का 649वां प्रकाश पर्व श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर गुरु सिंह सभा से ज्ञानी परमजीत सिंह ने शबद कीर्तन एवं गुरुवाणी का भावपूर्ण कीर्तन प्रस्तुत किया। कीर्तन के माध्यम से उन्होंने गुरु रविदास जी के जीवन, विचारों और शिक्षाओं को प्रस्तुत करते हुए मानवता, समानता, प्रेम, कर्म और भाईचारे का संदेश दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष जितेंद्र गोले ने कहा कि गुरु रविदास जी 15वीं शताब्दी के भक्ति आंदोलन के महान कवि एवं समाज सुधारक थे। उन्होंने ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ के संदेश के माध्यम से सच्ची भक्ति, आंतरिक शुद्धता और सामाजिक समता का मार्ग दिखाया। उन्होंने बताया कि गुरु रविदास जी का संदेश है कि यदि मन पवित्र हो तो घर ही तीर्थ बन जाता है।
जितेंद्र गोले ने गुरु रविदास जी के प्रसिद्ध दोहे “ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन के अन्न। छोटे-बड़े सब सम बसें, रविदास रहे प्रसन्न” का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु रविदास जी ने अपने विचारों से न्यायप्रिय, समतामूलक और भेदभाव मुक्त समाज की परिकल्पना की, जो आज भी प्रासंगिक है और लाखों लोगों को प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर जसवंत मंदरे, योगेश इंग्ले, सिद्धार्थ झरबडे, अरुण डोंगरे, नंदकिशोर मंदरे, राजकुमार मंदरे, विजेंद्र गोले, मुकेश अडलक, राजू पाटिल, मोनू चौहान, योगेश कवड़कर, सचिन सोनी, सलूजा जी, विनोद यादव, मोहन यादव, प्रदीप सरनेकर, बीआर तांडिया, बीपी सरिया, रामप्रसाद मंसूरे, सुरेश सावरकर सहित बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु एवं महिलाएं उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के अंत में उमेश महाजन ने सभी अतिथियों, सामाजिक बंधुओं एवं उपस्थित जनसमुदाय का आभार व्यक्त किया और गुरु रविदास जी के आदर्शों पर चलकर समाज को नई दिशा देने का आह्वान किया।

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