demand for regularization: नियमितीकरण के लिए उच्च न्यायालय की शरण में जाने को मजबूर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी
नगर पालिका सीएमओ को सौंपा ज्ञापन, न्याय की उम्मीद में खटखटाएंगे अदालत का दरवाजा


बैतूल। दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी अपने नियमितीकरण की मांग को लेकर अब उच्च न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं। वर्षों से स्थायी नौकरी की आस में काम कर रहे इन कर्मचारियों का कहना है कि सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। नियमितीकरण के लिए आवाज उठाने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। न्याय और अधिकारों की लड़ाई में कर्मचारियों ने अब कानूनी मार्ग अपनाने का फैसला किया है। जल्द ही सभी कर्मचारी एकजुट होकर याचिका दायर करेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उन्हें अब तक नियमित नहीं किया गया है। दिनांक 27 फरवरी 2024 को पीआईसी की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
पीआईसी बैठक में पास हुआ था प्रस्ताव
ज्ञापन में बताया गया कि 27 फरवरी 2024 को हुई पीआईसी बैठक में विषय क्रमांक 27 और संकल्प क्रमांक 532 के तहत दैनिक वेतन भोगियों के विनियमितीकरण और नियमितीकरण का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके तहत 16 मई 2007 से 1 सितंबर 2016 तक कार्यरत 219 कर्मचारियों का विवरण तैयार कर शासन को भेजा गया था। लेकिन अब तक शासन से इस पर कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।
शासन से दिशा-निर्देश का इंतजार
निकाय ने अक्टूबर 2023 में शासन के निर्देशानुसार गूगल शीट के माध्यम से जानकारी भेजी थी। लेकिन दिशा-निर्देश न मिलने से कर्मचारियों का भविष्य अंधकार बना हुआ है। प्रस्ताव में निकाय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि रिक्त पदों पर कर्मचारियों का नियमितीकरण अथवा स्थाईकर्मी योजना में विनियमितीकरण किया जाए।
दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने कहा कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष अमित सक्सेना, सुशील रागड़े, प्रमोद कुमार ढैकले, राजाराम यादव और रोहित वंजारे, हंसराज पवार, संतोष शिंदे, दीपक यादव, रामशंकर गाडगे, धीरज पवार, पिंटू बोडखे, राकेश एनिया, मधु चौकीकर, राहुल चौरसिया, नवीन नामदेव, फहीम शांह, कमलेश बघेल, शैलेंद्र पांसे, शैलेंद्र साहू, जगदीश साहू, राजेश छिपने, शिव शंकर प्रजापति, अनिल पाल सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे।




