National Education Festival: राष्ट्रीय शिक्षा महोत्सव में शामिल हुए बैतूल जिले के चार शिक्षक

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षकों की भूमिका पर हुआ विशेष विमर्श


बैतूल। भोपाल में आयोजित दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय शिक्षा महोत्सव’ में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक विचार-विमर्श हुआ। मुख्य विमर्श का केंद्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में शिक्षकों की भूमिका पर था। शिक्षक संदर्भ समूह बैतूल की जिला समन्वयक अभिलाषा बाथरी ने बताया कि इस महोत्सव में बैतूल जिले के चार शिक्षक शामिल हुए। इन शिक्षकों ने प्रदेश भर से आए शिक्षकों के साथ मिलकर विभिन्न सत्रों में सहभागिता की और विचार-विमर्श में भाग लिया। उन्होंने बताया कि इस दो दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षा महोत्सव ने शिक्षकों के लिए एक मंच प्रदान किया जहां वे अपनी चुनौतियों और अनुभवों को साझा कर सकते हैं। इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षकों की भूमिका को और सशक्त बनाना था। प्रतिभागियों ने इस महोत्सव को एक प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक अनुभव बताया।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुंबई से पधारीं ईसीसीई विशेषज्ञ डॉ. रीता सोनावत ने किया। उन्होंने बताया कि शिक्षा के केंद्र में हमेशा बच्चा होना चाहिए और शिक्षक को बच्चों के साथ काम करते समय नए संदर्भों की आवश्यकता होती है। डॉ. सोनावत ने कहा, यदि शिक्षक इस दृष्टिकोण से बच्चों के साथ काम करेंगे तो शिक्षा स्वतः ही रोचक हो जाएगी। महोत्सव में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षकों का विश्वास और उनका कार्य बच्चों की शिक्षा की दुनिया को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एड एट एक्शन के दक्षिण एशिया के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक रवि प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षक और शिक्षा को समग्रता में समझना जरूरी है। उन्होंने कहा, शिक्षक गण जिस विश्वास से काम कर रहे हैं वह बच्चों की शिक्षा की दुनिया को बदलने के लिए काफी है। इस महोत्सव में सीटीईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के. एम. भंडारकर, प्रोफेसर नीलिमा भगवती, ईसीसीई विशेषज्ञ ऊषा शर्मा, आदित्य बिडला ग्रुप के ग्रासिम सीएसआर हेड सतीश भुवित और अल्ट्रा टेक सीएसआर हेड शिव शंकरा ने भी महत्वपूर्ण विचार साझा किए। शिक्षक संदर्भ समूह के संस्थापक समन्वयक डॉ. दामोदर जैन ने बताया कि इस राष्ट्रीय शिक्षा महोत्सव को डॉ. गुलाब चौरसिया और गिजू भाई बधेका के शिक्षा के प्रति उनके अवदानों को समर्पित किया गया। डॉ. चौरसिया भारत के ऐसे पहले शिक्षाविद थे जिन्हें वर्ल्ड काउंसिल फॉर एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन का फेलो और आजीवन सदस्य चुना गया।

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