आज बैतूल में दिखेगी आदिवासी समाज की ताकत, विष्णुसिंह गोंड जयंती पर निकलेगी महारैली
महारैली के साथ होगा प्रतिमा गोंगो पूजन

बैतूल। अमर बलिदानी सरदार विष्णुसिंह गोंड की जयंती पर आज मंगलवार को बैतूल में आदिवासी समाज का शक्ति, संस्कृति और एकजुटता का प्रदर्शन होगा। जयस सरकार और जिले के आदिवासी समाज के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दोपहर 3 बजे रानी दुर्गावती ऑडिटोरियम से कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके बाद भव्य महारैली निकाली जाएगी और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ प्रतिमा गोंगो पूजा की जाएगी।
आयोजकों के अनुसार हर वर्ष की तरह इस बार भी जयंती समारोह को आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से समाजजन के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में जय सेवा, जय पड़ापेन और जय जोहार के नारों के साथ आदिवासी समाज की सांस्कृतिक एकता और गौरव की झलक दिखाई देगी। कार्यक्रम को लेकर आयोजन समिति ने समाज के सभी सगाजनों और नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।
– प्रतिमा स्थापना से हर साल निकाली जा रही महारैली
उल्लेखनीय है बैतूल बस स्टैंड पर 11 अगस्त 2024 को स्वतंत्रता सेनानी सरदार विष्णुसिंह गोंड की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया था। इसके बाद से प्रतिमा स्थापना दिवस एवं जयंती के अवसर पर हर वर्ष जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के तत्वावधान में महारैली का आयोजन किया जा रहा है। जयस जिला अध्यक्ष संदीप कुमार धुर्वे की अगुवाई में निकलने वाली रैली में बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष और युवा पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होते हैं।
– कौन थे सरदार विष्णुसिंह गोंड
स्वतंत्रता सेनानी सरदार विष्णुसिंह गोंड ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान रानीपुर में अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला था। साथियों के साथ थाने पर हमला कर हथियार लूटने और थाना भवन में आग लगाने की घटना उनके संघर्ष से जुड़ी है। बताया जाता है कि उस घटना के दौरान थाने में लगे लकड़ी के दो खंभों पर कुल्हाड़ियों के निशान आज भी मौजूद हैं, जो उस दौर के संघर्ष की याद दिलाते हैं।
– सरदार विष्णुसिंह गोंड के बलिदान को किया जाएगा याद
आयोजन का उद्देश्य शहीद सरदार विष्णुसिंह गोंड के बलिदान और संघर्ष की स्मृति को जीवंत रखना तथा नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराना है। आयोजकों ने बताया कि जयंती समारोह के माध्यम से आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकजुटता को भी प्रदर्शित किया जाएगा।




