भीमपुर क्षेत्र में अशिक्षा का फायदा उठाकर आदिवासियों की जमीन हड़पने का खेल
आदिवासी परिवार ने कलेक्टर से की शिकायत, गैर-आदिवासी के नाम भूमि हस्तांतरण निरस्त करने की मांग

बैतूल। भीमपुर तहसील के ग्राम बालारपुरा में आदिवासी परिवार की पुश्तैनी जमीन के एक हिस्से का गैर-आदिवासी के नाम हस्तांतरण किए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। पीड़ित परिवार ने कलेक्टर को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि आदिवासी वर्ग की अशिक्षा और जानकारी के अभाव का फायदा उठाकर जमीनों के रजिस्ट्री और नामांतरण कराए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ मामलों में सरकारी कर्मचारियों के सहयोग से भूमाफिया आदिवासी परिवारों की जमीनों पर कब्जा या हस्तांतरण कराने का प्रयास करते हैं, जिससे उनके वैधानिक हितों का हनन होता है।
शिकायत के अनुसार मामला ग्राम पंचायत दामजीपुरा के पटवारी हलका नंबर 21 स्थित खसरा क्रमांक 6/3 की 1.339 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा है। यह भूमि मूल रूप से स्वर्गीय रमेश जैराम रोकडे के नाम दर्ज थी। उनकी मृत्यु के बाद राजस्व अभिलेखों में उनके उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज किए गए। शिकायतकर्ता परिवार का कहना है कि वर्तमान में भी भूमि पर उनका कब्जा है और वे खेती कर रहे हैं।
परिवार के अनुसार 27 जनवरी 2026 को भूमि के 0.6690 हेक्टेयर हिस्से की रजिस्ट्री भैंसदेही निवासी लक्ष्मी नारायण के पक्ष में की गई। शिकायत में कहा गया है कि संबंधित भूमि आदिवासी परिवार की होने के साथ अधिसूचित क्षेत्र में आती है। ऐसे में मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 165(6) के प्रावधानों के तहत भूमि हस्तांतरण की वैधानिकता की जांच आवश्यक है।
शिकायतकर्ताओं ने रजिस्ट्री दस्तावेज में भूमि की अधिसूचित क्षेत्र से संबंधित स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दस्तावेज में भूमि को अधिसूचित क्षेत्र से बाहर दर्शाए जाने के आधार पर पंजीयन की कार्रवाई की गई। परिवार ने इस बिंदु की भी जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रजिस्ट्री के दौरान संबंधित राजस्व अभिलेखों और वैधानिक प्रावधानों का पालन हुआ था या नहीं।
नामांतरण की प्रक्रिया को लेकर भी शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। शिकायत के मुताबिक 27 जनवरी को रजिस्ट्री होने के करीब 20 दिन बाद 16 फरवरी 2026 को संबंधित भूमि का नामांतरण कर दिया गया। परिवार ने हलका पटवारी नितेश कुंभरे सहित संबंधित राजस्व अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि नामांतरण से पहले भूमि की प्रकृति, स्वामित्व और आदिवासी भूमि हस्तांतरण से जुड़े प्रतिबंधों की पर्याप्त जांच नहीं की गई।
इसके अलावा तहसीलदार न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 0174/अ-27 के तहत चल रही बंटवारे की कार्यवाही पर भी परिवार ने आपत्ति दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि रजिस्ट्री, नामांतरण और बंटवारे की कार्रवाई को एक साथ देखते हुए पूरे मामले की जांच की जानी चाहिए, ताकि भूमि हस्तांतरण और उसके बाद की राजस्व कार्रवाई की वैधानिकता स्पष्ट हो सके।
परिवार ने कलेक्टर से विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने, 27 जनवरी 2026 की रजिस्ट्री और 16 फरवरी 2026 के नामांतरण की वैधानिकता की जांच कराने तथा अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं ने जिम्मेदार पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग भी की है।




