बेटियों ने दी पिता को मुखाग्नि, परंपराओं को तोड़ पेश की नई मिसाल।

अंतिम संस्कार में निभाई हर रस्म, भावुक हुआ माहौल।

बैतूल। सामाजिक परंपराओं को नई दिशा देने वाली एक मार्मिक और प्रेरणादायक घटना गुरुवार को सामने आई, जहां बेटियों ने अपने पिता को अंतिम विदाई देकर समाज में एक सशक्त संदेश दिया। गौठाना निवासी (मूल निवासी पारबिरोली) 81 वर्षीय भीमराव भोसले का गुरुवार रात 9 बजे निधन हो गया। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।

शुक्रवार को उनके निवास गौठाना से अंतिम यात्रा निकाली गई, जो कोठी बाजार स्थित मोक्षधाम पहुंची। यहां परंपरागत रूप से जहां अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी पुत्रों द्वारा निभाई जाती है, वहीं इस बार उनकी बेटियों ने यह दायित्व निभाकर सामाजिक सोच को नई दिशा दी।

मृतक की पुत्रियां शकुंतला, विमल, त्रिवेणी, पुष्पा और सरोज ने पूरे विधि-विधान के साथ अपने पिता का अंतिम संस्कार किया। इस दौरान शकुंतला ने मुखाग्नि दी, वहीं सरोज ने चिता के चारों ओर मटका लेकर परिक्रमा की रस्म पूरी की। बेटियों द्वारा निभाई गई इन सभी रस्मों को देखकर उपस्थित जनसमूह भावुक हो उठा। इस दृश्य ने सभी की आंखें नम कर दीं, यह भी संदेश दिया कि बेटियां किसी भी जिम्मेदारी में बेटों से कम नहीं हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि संस्कार और कर्तव्य भावनाओं और जिम्मेदारी से तय होते हैं।

समाज के लिए यह एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां बेटियों ने अपने पिता को अंतिम विदाई देकर समानता और सशक्तिकरण की एक मिसाल पेश की।

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