नगर परिषद ने बिना वर्क ऑर्डर कराया काम, तीन साल बाद भी नहीं मिला भुगतान।

मोक्षधाम समतलीकरण विवाद में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पर गंभीर आरोप। ठेकेदार ने सीएमओ को सौंपा आवेदन, ब्लैकलिस्ट करने की धमकी का आरोप।

बैतूल। आठनेर नगर परिषद में बिना वर्क ऑर्डर कराए गए कार्यों के भुगतान को लेकर नया विवाद सामने आया है। नगर के एक ठेकेदार ने नगर परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विधायक प्रतिनिधि पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी को आवेदन सौंपकर भुगतान दिलाने की मांग की है। मामले में ब्लैकलिस्ट करने की धमकी और दूसरे ठेकेदार के नाम से भुगतान जारी करने जैसे आरोपों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आठनेर निवासी प्रोपराइटर सोपान जगताप, जगताप इंजिनियरिंग रिसोर्सेस ने सीएमओ को दिए आवेदन में बताया कि वर्ष 2023 में वार्ड क्रमांक 9 स्थित माझी समाज के मोक्षधाम में जेसीबी से समतलीकरण का कार्य उनसे करवाया गया था। आरोप है कि यह कार्य नगर परिषद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के मौखिक निर्देश पर कराया गया, जबकि कोई लिखित वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया। आवेदन में कहा गया कि सामाजिक लोगों की मौजूदगी में नियमानुसार कार्य पूरा किया गया और उस समय समाज के लोग कार्य से संतुष्ट भी थे।

सोपान जगताप ने दावा किया कि मोक्षधाम के अलावा उनसे ट्रेनचिंग ग्राउंड में जेसीबी चलाने, वार्ड क्रमांक 10 में बस स्टैंड से टंकी रोड तक सड़क किनारे समतलीकरण और वार्ड क्रमांक 15 में शनि मंदिर के पास नाली स्लैब तोड़कर समतलीकरण जैसे अन्य कार्य भी बिना वर्क ऑर्डर के कराए गए। उनका आरोप है कि हर बार भुगतान और वर्क ऑर्डर बाद में जारी करने का आश्वासन दिया जाता रहा।

आवेदन में कहा गया है कि नगर परिषद अधिकारियों के लगातार तबादलों का हवाला देकर भुगतान टालते रहे, लेकिन बाद में अक्टूबर 2025 में इसी मोक्षधाम समतलीकरण कार्य का वर्क ऑर्डर सर्वश्री डेवलपमेंट के नाम से जारी कर भुगतान कर दिया गया। इसकी जानकारी मिलने पर जब उन्होंने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विधायक प्रतिनिधि से चर्चा की तो उन्हें भुगतान का भरोसा दिया गया, लेकिन तीन वर्ष बीतने के बाद भी राशि नहीं मिली।

सोपान जगताप ने आरोप लगाया कि बाद में नगर परिषद उपाध्यक्ष ने उन्हें केवल 20 हजार रुपये लेकर मामला शांत करने की बात कही और भविष्य में किसी भी नगर परिषद कार्य का भुगतान नहीं होने तथा उनकी फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी दी। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि वर्तमान में उनकी फर्म द्वारा लिए गए अन्य टेंडर कार्यों में भी द्वेषपूर्ण रवैया अपनाकर बाधा डाली जा सकती है।

ठेकेदार ने सीएमओ से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर स्वयं के विवेक से भुगतान कराने तथा उनके साथ हुई कथित द्वेषपूर्ण कार्रवाई पर संज्ञान लेने की मांग की है।

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