आखिर क्रांतिकारियों के साथ आजाद भारत की सरकारों का यह सौतेला व्यवहार क्यों? हेमंत चंद्र दुबे बबलू

मौलाना अबुल कलाम आजाद बने भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री, और कहलाये भारत रत्न, वही 27 वर्ष की आयु में सरफरोशी की तमन्ना लिए फांसी के फंदे पर झूल गए क्रांतिकारी अशफाकउल्लाह , सम्मान में मिला गोरखपुर के चिड़ियाघर का नाम? आखिर क्रांतिकारियों के साथ आजाद भारत की सरकारों का यह सौतेला व्यवहार क्यों?
भाग _15_
*समर्थ को न दोष गुसाई_यही पंक्ति भारतीय राजनीति और भारतीय समाज का मूल मंत्र है_जिसके चलते यह सम्मान लिए बांटे और वितरित किए जाते हैं*
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इस देश में जो समर्थवान है, सर्वोच्च है वही इस देश में सम्मानों के हकदार हुए है, जिसके पास राजनैतिक पहुंच, सम्मान पाने का प्रबंधन होता हैं, सत्ता का जो प्रिय होता हैं, वही सम्मान के करीब होता हैं।
अब भारत की दो महान विभूतियों के जीवन के विश्लेषण आंकलन को गहराई से करके देखिये तो समझ आ जाएगा कि सम्मानों की पृष्ठभूमि और असल कहानी क्या है? देश के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद जिनका जन्म अरब की पवित्र धरती मक्का में हुआ। कालान्तर मे जम्मू कश्मीर से होते हुए परिवार कोलकत्ता आकर बस गया। मौलाना अपनी पढ़ाई करने लगे और फिर कांग्रेस पार्टी से जुड़ गये । इतिहास में वे सबसे कम उम्र के बनने वाले कांग्रेस के अध्यक्षों में से एक है, स्वतंत्रता के आंदोलन में भी मौलाना ने हिस्सा लिया, कुछ समय के लिए जेल भी गए, देश आजाद हुआ, मौलाना विद्वान चिंतक विचारक थे और निश्चित ही उन्हें आजाद भारत का प्रथम शिक्षा मंत्री बनने का गौरव हासिल हुआ, देशवासियों को भी गर्व हुआ, मौलाना अपनी विद्वता, ज्ञान से देश की शिक्षा को विकसित करने लगे , जामिया मिलिया इस्लामिया जैसे बड़े , नामवर प्रसिद्ध विश्वविधालय बनवाने का कार्य मौलाना ने किया , विश्व विद्यालय अनुदान आयोग का गठन करवाया। अब शिक्षाविद मनीषियों के विश्लेषण करने का काम है कि मौलाना की शिक्षा नीति ने देश और शिक्षा कितना भला किया या उसे गर्त में पहुंचाया, लेकिन उनके शिक्षा जगत में किए गए उल्लेखनीय , अनुकरणीय कार्यों के लिए सन 1992 मरणोपरांत भारत रत्न घोषित किये गए और उन्हें भारत रत्न बनने का गौरव हासिल हुआ।
वही दूसरी ओर उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर में 22 अक्टूबर 1900 को एक क्रांतिकारी का जन्म हुआ नाम था अशफाकुल्लाह , भारत मां की आजादी , गुलामियों की बेड़ियों से भारत मां आजाद करने के लिए अपने साथियों के साथ मिलकर क्रांतिकारियों के एक संगठन का गठन कर क्रांति की लौ प्रज्वलित करने लगे। विचार हुआ कि बिना आर्थिक मजबूती के देश को कैसे आजाद किया जा सकता हैं। तय हुआ कि सरकारी खजाने को। लुट लिया जाए, बस यही वह घटना है जो काकोरी रेल डकैती के नाम से भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में क्रान्तिकारी अशफाकउल्ला, ठाकुर रोशन सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल के नाम से स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। तीनों ही गिरफ्तार हुए और अंग्रेजी हुकूमत ने तीनों को ही राष्ट्रद्रोह के जुल्म में फांसी की सजा सुनाई और वे हंसते हंसते आजादी के तराने गाते फांसी के फंदे पर सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजू ए कातिल में है भारत मां के जयकारों के साथ झूल गये। लेकिन स्वतंत्र भारत की सरकारों ने इन क्रांतिकारियों के साथ कौनसा व्यवहार किया? सत्ता के मालिकों ने देश के क्रांतिकारियों के साथ आखिर अन्याय क्यों किया? सिर्फ इसलिए कि वे देश को आजाद कराने के लिए क्रांति की राह पर चल पड़े? वे अंग्रेजों की गोलमेज कांफ्रेस का हिस्सा नहीं बन सके? क्रांतिकारी अंग्रेजों की दृष्टि में अपराधी थे, और स्वतंत्र भारत के हुक्मरानों की नजरों में आज भी अपराधी ही हैं तब ही तो वे भारत के सम्मानों से दूर है? शहीद अशफाकुल्लाह के हिस्से मे गोरखपुर का चिड़ियाघर आया ,जो क्रांतिकारी अशफाकउल्लाह प्राणी उद्यान के नाम से गोरखपुर में स्थित है। देश के लिए फांसी के फंदे पर सरफरोशी की तमन्ना लिए 27 वर्ष की आयु में झूल जाने का यह सम्मान महान क्रांतिकारियों और शहीदों के हिस्से में आया। देश की जनता कोई नहीं पूछता कि मौलाना अबुल कलाम आजाद भारत रत्न है , तो क्रांतिकारी वीर भारत मां के महान सपूत अशफाकउल्लाह के हिस्से में क्या आया? चिड़िया घर, उद्यान, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन जो उजड़ जाते , बिखर जाते है, टूट जाते है , ये आये तो कुछ नाम वे आये तो कुछ नाम, ये सम्मान देश की सरकारों, राजनेताओं, ने घड़ियाली आंसू बहाते क्रांतिकारियों के हिस्से में दिये है। और मेरे देश की जनता मुफ्त की योजनाओं की रकम लेकर यह अन्याय मेरे महान क्रांतिकारियों के साथ हंसते हंसते होते देखते रहती है,क्योंकि हम उन महान बलिदानियों के कारण आजाद हो गए, हम क्या जाने जुल्म सितम ? हम क्या जाने यातनाएं ? हम क्या जाने फांसी के फंदे का नाप?
हम तो लाडली बहना का सम्मान की रकम पाकर खुश है।
नोट _ जो सम्मानित हुए हैं उनके प्रति हमारा पूरा सम्मान है और उनके कार्यों को नमन करते हैं, लेकिन कोई तो समझाए कि क्रांतिकारी अशफाकउल्लाह के हिस्से का सम्मान किधर है? ठाकुर रोशन सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल पर अगली श्रृंखला में निरन्तर __________

हेमंत चंद्र दुबे बबलू




