परामर्शदात्री समिति की बैठक में कर्मचारियों ने रखीं लंबित मांगें|

मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन, पोर्टल हाजिरी से लेकर वेतन तक उठे मुद्दे | एचआरए बजट, एनपीएस जमा और पदोन्नति पर तत्काल कार्रवाई की मांग | परीक्षा ड्यूटी में दूरी घटाने और गंभीर बीमार शिक्षकों को राहत देने का प्रस्ताव | अनुकंपा नियुक्ति, मेडिकल बिल भुगतान और नियमितीकरण पर निर्णय की अपेक्षा|

बैतूल। कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार 17 फरवरी को जिला परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न संगठनों के जिला अध्यक्ष उपस्थित रहे। बैठक में अपर कलेक्टर की उपस्थिति में कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने संघों से संबंधित समस्याएं रखते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया।

मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने कलेक्टर को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए विभिन्न मांगों का निराकरण शीघ्र कराने की मांग की। संघ के जिला अध्यक्ष सचिन राय ने ईएचआरएमएस पोर्टल एवं अन्य सभी पोर्टलों पर ऑनलाइन हाजिरी तत्काल बंद करने तथा जहां हाजिरी दर्ज नहीं हो पा रही है वहां मैनुअल हाजिरी मान्य करने की मांग उठाई। शिक्षा विभाग में एचआरए के बजट अभाव के कारण वेतन देरी से जारी होने का मुद्दा उठाते हुए प्रदेश कार्यालय से समन्वय कर एचआरए बजट उपलब्ध कराकर प्रत्येक माह की एक तारीख को वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही गई।

संघ ने दसवीं और बारहवीं की मध्यप्रदेश परीक्षा में नियुक्त केंद्राध्यक्षों को 70 से 100 किलोमीटर दूर भेजे जाने पर आपत्ति जताते हुए परीक्षा ड्यूटी की दूरी लगभग 20 किलोमीटर के दायरे में सीमित करने की मांग की। कर्मचारियों के उपचार के दौरान लंबित मेडिकल बिलों का भुगतान करने के लिए शासन से बजट शीघ्र प्राप्त कर राशि जारी करने की मांग भी रखी गई।

– तत्काल क्रमोन्नति प्रदान करने की मांग 

शिक्षक संवर्ग को 35 प्रतिशत क्रमोन्नति का लाभ देने तथा जिन कर्मचारियों की 12, 24 और 30 वर्ष की सेवा पूर्ण हो चुकी है उन्हें माह अनुसार तत्काल क्रमोन्नति प्रदान करने की बात कही गई। सभी विभागों में लंबित अनुकंपा नियुक्तियों को शीघ्र पूर्ण करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। प्रति नियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारियों की एनपीएस राशि कार्यालय द्वारा कटौती के बावजूद नियमानुसार एनपीएस में जमा नहीं किए जाने से शासन के लगभग 14 प्रतिशत अंशदान और ब्याज का नुकसान होने का मुद्दा उठाते हुए इसे तत्काल निराकृत करने की मांग की गई।

– बीमारी से ग्रस्त शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगाई जाए

गुरुजी शिक्षकों को नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता के आधार पर नियमित करने तथा अध्यापक संवर्ग को नियुक्ति दिनांक से नियमितीकरण का लाभ देने की मांग दोहराई गई। परीक्षा अवधि में गंभीर बीमारी से ग्रस्त शिक्षकों की ड्यूटी न लगाने तथा शैक्षणिक सत्र में अन्य कारणों से अध्यापन कार्य पूर्ण नहीं हो पाने की स्थिति में परीक्षा परिणाम को लेकर शिक्षकों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न किए जाने की मांग भी रखी गई। बैठक में प्रस्तुत इन मांगों पर प्रशासन से शीघ्र सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा व्यक्त की गई।

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