Abvp news: जनजाति वीरांगना रानी दुर्गावती की 500वी जयंती मनाई
अखिल भारतीय विधार्थी परिषद के तत्वावधान में हुआ आयोजन, विद्यार्थियों को बताई रानी दुर्गावती की वीरगाथा

बैतूल। अखिल भारतीय विधार्थी परिषद ने शुक्रवार 5 अक्टूबर को ओपन ऑडिटोरियम में गोंडवाना साम्राज्य की वीरांगना रानी दुर्गावती की 500 वी जयंती मनाई। जयंती समारोह को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद बैतूल नगर मंत्री सोनू बोरबन ने बताया कि रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1924 में गोंडवाना राज्य में हुआ था। वह कालिंजर के राजा कीर्तिसिंह चंदेल की एकलौती संतान थी। दुर्गाअष्टमी के दिन बांदा जिले के कालिंजर किले में जन्म होने के कारण इनका नाम दुर्गावती रखा गया था। उनके तेज, वीरता, साहस के कारण लोग उनका बहुत सम्मान करते थे।
प्रांत जनजाति छात्र कार्य प्रमुख देवेंद्र धुर्वे ने कहा रानी दुर्गावती हमारे देश की वो वीरांगना है, जिन्होंने अपने राज्य की रक्षा के लिए मुगलों से युद्ध कर वीरगति को प्राप्त हो गई। वे बहुत ही बहादुर और साहसी महिला थीं, जिन्होंने अपने पति की मृत्यु के बाद न केवल उनका राज्य संभाला बल्कि राज्य की रक्षा के लिए कई लड़ाईयां भी लड़ी। महारानी दुर्गावती राजा कार्तिक सिंह चंदेल की एकमात्र संतान थी। रानी दुर्गावती का विवाह राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत से हुआ। रानी दुर्गावती के विवाह के 4 वर्ष बाद ही दलपत शाह का निधन हो गया। रानी दुर्गावती का पुत्र नारायण शाह मात्र 3 वर्ष का ही था स्वयं ही रानी दुर्गावती ने गढ़ मंडला का शासन संभाल लिया। शासन संभालते ही सूबेदार तेज बहादुर को मुंह की खानी पड़ी। रानी दुर्गावती ने अकबर को भी कई बार परास्त किया। महाराणा प्रताप शिवाजी के बाद आज भी उनका लिया जाता है। दुर्गावती ने गढ़ मंडला पर 16 वर्ष तक शासन किया। मंदिर, बावड़ी, धर्मशाला, कुएं, मठ आदि का शासनकाल में निर्माण कराया। 50 से अधिक युद्ध लड़ने वाली ऐसी वीरांगना को हम याद करते हुए आज उनकी 500वी जयंती मना रहे हैं, हमारे देश की नारी शक्ति को भी वीरांगना रानी दुर्गावती से।सीखने की आवश्यकता है। नगर उपाध्यक्ष अशोक रघुवंशी ने कहा कि हमें जीवन में अपनी मातृभूमि के लिए और धर्म के लिए प्राण निछावर करने वाली रानी दुर्गावती जी को याद कर उनके पद चिन्हों पर चलने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता मयंक, अनुराग यादव, अनुराग, रोशन कोसे, देव प्रजापति, देवेंद्र पांसे, अमन कनोजे एवं छात्र छात्राएं उपस्थिति रहे।




