Crime News: प्रधानमंत्री कालेज आफ एक्सीलेंस में बेटियों की प्रोत्साहन राशि का गबन, बाबुओं ने मिलकर हड़प लिए डेढ़ करोड़

कई खातों में 35 से 40 बार तक डाली गई राशि

Crime News: बैतूल। प्रधानमंत्री कालेज आफ एक्सीलेंस  जेएच में गांव की बेटी योजना के तहत हुए लगभग 1.44 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच में यह खुलासा हुआ है कि बाबुओं ने अपने चहेतों के बैंक खातों में राशि जमा कर गबन किया है। कलेक्टर द्वारा पांच सदस्यों की टीम बनाई गई है। वहीं आयुक्त कार्यालय नर्मदापुरम से भी दो सदस्यीय टीम जांच के लिए कॉलेज पहुंच गई है।

घोटाले में योजना के तहत कार्य करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। ऑपरेटर लापता हो गया है और उसका मोबाइल भी बंद है। बताया जा रहा है कि जिन खातों में राशि डाली गई है उसमें ऑपरेटर का भी खाता शामिल है। अधिकांश राशि प्रभातपट्टन ब्लॉक के लोगों के खाते में डाली गई है। दोनों ही टीम मामले की जांच में जुट गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद धोखाधड़ी करने वाले कर्मचारियों पर एफआइआर की जाएगी। 

जेएच कॉलेज में हुए गांव की बेटी योजना के तहत घोटाले की जांच के लिए सोमवार सुबह ही कलेक्टर द्वारा बनाई गई पांच सदस्य टीम कॉलेज पहुंच गई थी। जिला ट्रेजरी अधिकारी अरुण वर्मा के नेतृत्व में यह टीम जांच कर रही है। टीम ने सबसे पहले पहुंचकर जिन कमरों को सील किया गया था, जहां पर की योजना के तहत भरे गए फॉर्म रखे हुए थे उन कक्षों को खुलवाया है। फार्म की बारीकी से जांच की जा रही है। इसके बाद टीम के सदस्य बैंक खातों की जानकारी के लिए बैंकों में पहुंचे और जिन खातों में यह राशि जमा कराई गई है उनकी जानकारी ली जा रही है।

जांच में प्रथम दृष्टया 1 करोड़ 44 लाख 65 हजार का घोटाला सामने आया है। लगभग 95 खातों में यह राशि डाली गई है। योजना के तहत राशि डालने का काम कॉलेज में ही पदस्थ कर्मचारी रिंकू पाटिल द्वारा किया जाता था। उनके पास ऑपरेटर के रूप में दीपेश डेहरिया कार्य करता था। दोनों ही जिले प्रभातपट्टन ब्लॉक के रहने वाले हैं।

प्रथम दृष्टया अधिकांश राशि प्रभात पट्टन ब्लॉक के लोगों के खाते में ही राशि डालना सामने आया है। ऑपरेटर दीपेश के खाते में भी राशि डाली गई थी। जान-पहचान और रिश्तेदारों के खातों में यह राशि डाली गई थी। ऑपरेटर लापता हो गया है और उसका मोबाइल भी बंद है।

 यह है गांव की बेटी योजना

गांव में रहने वाले बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने शासन की गांव की बेटी योजना है। योजना के तहत उन छात्राओं को छात्रवृत्ति दिए जाने का प्रावधान है, जिन्होंने 60 प्रतिशत अंकों के साथ 12 वीं कक्षा प्रथम श्रेणी में हासिल की है। छात्राओं को प्रति वर्ष 10 महीने तक 500 रुपए प्रति महीने की छात्रवृत्ति दी जाती है। यानी कि प्रति छात्रा 5 हजार रुपए मिलता है।

कई बार जमा हुई राशि

गांव की बेटी योजना के तहत जो घोटाला सामने आया है, उसमें जिन खातों में राशि गई है उसमें एक नहीं दो नहीं बल्कि अधिकांश खातों में 35 से 40 बार तक राशि डाली गई है। बार-बार खातों में राशि जाने से मामला संदिग्ध नजर आया और ऑडिट रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ। जेएच कॉलेज का जुलाई 2019 से जुलाई 2024 तक ऑडिट किया गया है, जिसमें जो घोटाला सामने आया है। वह वर्ष 2022-23 और 2023-24 का है। इन वर्षों में ही अन्य लोगों के खाते में योजना के तहत राशि डाली गई। ऑडिट में यह घोटाला सामने आने के बाद ऑडिट करने वाले अधिकारियों ने इस संबंध में जानकारी उच्च शिक्षा विभाग और महालेखाकार को पत्र लिखकर दी थी। महालेखाकार द्वारा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी को मामले की जांच कराए जाने को लेकर पत्र लिखा था। इसके बाद यह जांच शुरू की गई है।घोटाले की जांच के लिए भोपाल से भी टीम पहुंची है। दो सदस्य टीम भी दोपहर में पहुंच गई थी। सहायक आयुक्त नर्मदापुरम, भोपाल डॉक्टर एम प्रसाद और अतिरिक्त संचालक फाइनेंस शामिल है। टीम के सदस्यों द्वारा मामले की जांच की जा रही है।

अन्य योजनाओं पर भी उठ रहे सवाल

जिस तरह से गांव की बेटी योजना में लाखों का घोटाला सामने आया है, जिसके बाद कॉलेज में ही चलने वाली अन्य योजनाओं के संचालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का यहां तक मानना है कि यदि इन योजनाओं की भी जांच की गई तो घोटाला सामने आ सकता है।कालेज प्राचार्य मीनाक्षी चौबे ने बताया कि मामले की जांच के लिए दो टीम कॉलेज पहुंची है। आयुक्त की टीम भी नर्मदापुरम से आई है। जिन खातों में राशि गई है, उनकी जांच की जा रही है। 1.44 करोड़ रुपए का गांव की बेटी योजना में घोटाला है। ऑडिट में यह सामने आया है।

 

 

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