ग्राम कुप्पा में जल जीवन मिशन 6 माह से ठप।
ट्रायल के बाद बंद हुई जल सप्लाई, पाइप लीकेज बना कारण। ग्रामीण दूर-दराज से ला रहे पानी, बढ़ी परेशानी। पीएचई विभाग ने अब तक पंचायत को नहीं सौंपा प्रोजेक्ट। टंकी में सीपेज के आरोप, शौचालय भी हुए बेकार।

बैतूल। घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के ग्राम कुप्पा में जल जीवन मिशन योजना पिछले छह माह से पूरी तरह बंद पड़ी है। कलेक्टर के निर्देश जारी होने के बाद भी पीएचई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। योजना के ठप होने से गांव में पेयजल संकट गहराता जा रहा है और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। गर्मी बढ़ने के साथ स्थिति और गंभीर होती जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
– ट्रायल के बाद बंद हुई जल सप्लाई, पाइपलाइन की खामियों ने रोकी योजना
ग्रामीणों के अनुसार योजना का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद महज 15 दिनों तक पानी सप्लाई कर ट्रायल किया गया था। इस दौरान गांव के कई हिस्सों में पाइपलाइन से पानी बहने और लीकेज की शिकायतें सामने आईं। तकनीकी खामियों को दूर करने के बजाय विभाग ने पानी की सप्लाई ही बंद कर दी। इसके बाद से योजना दोबारा शुरू नहीं हो सकी, जिससे लाखों की लागत से बनी व्यवस्था उपयोग से बाहर हो गई।
– पानी के लिए संघर्ष, ग्रामीणों को दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा
जल सप्लाई बंद होने के कारण ग्राम कुप्पा के लोगों को अब पानी के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे दूर-दराज के कुओं और हैंडपंप से पानी लाकर किसी तरह अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। कई बार लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और श्रम दोनों की बर्बादी हो रही है। पानी की कमी के कारण पशुपालन और अन्य घरेलू कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
– पीएचई विभाग ने पंचायत को नहीं सौंपा प्रोजेक्ट, सरपंच पर बनाया जा रहा दबाव
ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचई विभाग ने अब तक जल जीवन मिशन योजना को ग्राम पंचायत को विधिवत हैंडओवर नहीं किया है। इसके बावजूद सरपंच पर योजना का जिम्मा लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। अधूरी और खामियों से भरी योजना को बिना सुधार के पंचायत को सौंपने की कोशिश से विवाद की स्थिति बनी हुई है। इससे प्रशासनिक लापरवाही भी उजागर हो रही है।
– टंकी में सीपेज के आरोप, पानी के अभाव में शौचालय भी हो गए बेकार
ग्रामीणों ने पानी की टंकी में सीपेज होने के आरोप भी लगाए हैं, जिससे योजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं पानी की अनुपलब्धता के कारण स्वच्छता मिशन के तहत बनाए गए शौचालय भी उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं। सरकार द्वारा लाखों रुपए खर्च कर बनाई गई यह योजना अधिकारियों की उदासीनता के कारण निष्प्रभावी साबित हो रही है। ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और वे जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।




