खेती किसानी: सोयाबीन से हो जाएंगे मालामाल, बुवाई करने वाले किसान कर लें यह उपाय

मानसून में देरी से न घबराएं, करें ये उपाय, पाएंगे अच्छी पैदावार

Kheti Kisani News : बैतूल।  देश में सोयाबीन को पीला सोना कहा जाता है।इस बार मानसून के लेट हो जाने पर किसान असमंजस में हैं कि आखिर वे ऐसा क्या करें कि देरी से बुवाई करने के बाद भी सोयाबीन उन्हें मालामाल कर दे। आइये हम आपको बताते हैं कि बुवाई से लेकर फसल की कटाई तक ऐसा क्या प्रबंधन करें कि बंपर पैदावार मिल जाए।

सोयाबीन की बुवाई आपको 4-5 इंच वर्षा होने पर 20 जून से 10 जुलाई के बीच में ही करनी चाहिए सोयाबीन की बुवाई आपको हमेशा सीड ड्रिल से ही करना चाहिए । अगर हम बात करें लाइन से लाइन की दूरी की तो लाइन से लाइन की दूरी 16 इंच रखनी चाहिए , इससे अच्छा उत्पादन मिलता है इसलिए आप लाइन से लाइन की दूरी 16 से14 इंच ही रखें,और पौधों से पौधों की दूरी 4 से 5 सेमी.रखें एवं बीज को 2 से 3 से.मी गहराई में बोएं, बुवाई के समय डीएपी खाद का प्रयोग करना चाहिए। प्रति एकड़ आप 30 किलोग्राम डीएपी और 20 किलोग्राम पोटास खाद का प्रयोग कर सकते है प्रति एकड़ बीज दर की बात करें तो 1 एकड़ में 30 से 40 किलोग्राम सोयाबीन बीज की आपको बुआई करना चाहिए ।

सोयाबीन की  खेती में खरपतवार नियंत्रण। Kheti Kisani News

सोयाबीन में खरपतवार को नियंत्रण करना बहुत ज्यादा जरूरी है क्योंकि अगर खरपतवार को नियंत्रण नहीं करते हैं तो यह पैदावार को 30 से 40 प्रतिशत तक कम कर देता हैं। खरपतवार नियंत्रण के लिए  निदाई गुड़ाई का तरीका भी अपना सकते है और आप रासायनिक दवाइयों से भी खरपतवार को नियंत्रण कर सकते है।

सोयाबीन फसल के लिए कीट नियंत्रण । खेती किसानी

कीटों व रोगों को नियंत्रण करने के लिए हमें समय-समय पर स्प्रे करने की आवश्यकता होती है। सोयाबीन की फसल में पहला स्प्रे आपको बुआई से 25 से 30 दोनों के बीच में करना चाहिए। दूसरा स्प्रे आपको बुआई के 40 से 45 दिनों के बीच में करना है अगर इसके बाद भी आप को कीटों का प्रकोप दिखे तो आप को तीसरा स्प्रे बुवाई के 60 से 65 दिनों के बीच करना चाहिए ।

सोयाबीन फसल के प्रमुख रोग । Kheti Kisani News

चक्र्भंग (गर्डल बीटल):

इसे किसान भाई रिंग कटर के नाम से भी जानते हैं । इसकी पहचान बड़ी आसनी से किसान भाई कर सकते हैं। जब पूरे खेत में घूमकर देखते है तो पोधे में कई-कई पर तीन पती सूखी हुई दिखती हैं जिसे देखने पर पता लगता है कि पतों के निचे सिरे में कट लगा है जिसे देखकर आप चक्र्भंग का पता लगा सकते हैं। इस से बचाव के लिए आप कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव कर सकते हैं।

पीला मोजेक:

यह एक विषाणु जनित रोग है और एक पौधे से दूसरे पौधे में फैलता है। धीरे धीरे खेत में पूरी फ़सल में फैल जाता है। यह रोग सफ़ेद मक्खी के द्वारा फेलता है ।यदि आप कि फ़सल में कुछ ही पौधो में ये रोग दिखता है तो आप उन पौधो को तुरंत ही उखाड़ दें। यदि यह रोग ज्यादा पौधों में फैल जाता है तो बिना देरी किए तुरंत ड़ाइमेथोएट एवं मेटासिस्टोक्स 500-600 मि.ली. दवा या थायोमेथोक्साम 100 ग्राम दवा को 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव कर सकते हैं।

तंबाकू इल्ली :

तंबाकू इल्ली हल्के भूरे रंग की होती है। यह इल्ली रात के समय फ़सल को नुकसान पहुचाती है और तेजी से पत्तियों को खाती है। इसके कारण पत्तियों का रंग पीला पड़ जाता है इससे बचाव के लिए आप प्रति एकड़ 180 मिलीलीटर स्पाइनेटोरम 11.7 एस.सी या प्रति एकड़ फ्लूबेंडियमाइड 39.35 प्रतिशत को 60-70 मिलीलीटर पानी में मिला कर छिड़काव करें।

सेमीलूपर इल्ली :

सोयाबीन की फसल में इन का प्रकोप अगस्त से सितम्बर के महीने में ज्यादा देख ने को मिलता है यह हरे रंग की इल्ली होती है इससे बचाव के लिए आप इल्लियों की शुरूआती अवस्था में कीटनाशक का छिड़काव कर दें।

सोयाबीन की बेहतर किस्में । Kheti Kisani News

जेएस -2034 सोयाबीन:

  • यह एक हेक्टेयर में 24-25 क्विंटल उत्पादन देने की क्षमता रखती है ।
  • पौधों की ऊंचाई 75-80 से.मी होती है।
  • बुवाई के लिए 30-35 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ पर्याप्त है।
  • फसल की कटाई 87-88 दिन में हो जाती है।
  • इस किस्म में फूल का रंग सफ़ेद तथा फलिया फ्लैट होती हैं।
  • यह क़िस्म पीला विषाणु रोग, चारकोल सड़न, पत्ती धब्बा एवं कीट प्रतिरोधी है ।
  • यह किस्म कम वर्षा होने पर भी अच्छा उत्पादन देती है।

आर.वी.एस 2001-4 सोयाबीन :

  • सोयाबीन की यह किस्म 95 से 100 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।
  • यह किस्म 26 से 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देने की क्षमता रखती है ।
  • पौधों का पीला हो जाना, जड़ सड़न रोग और इल्ली का इस किस्म पर कम प्रभाव होता है।
  • अधिक बारिश के समय खेतों में पानी भर जाने पर फसल गलेगी नहीं।
  • खेत से पानी सूखने पर भी पौधा जल्दी नहीं सूखेगा।
  • यह किस्म पानी भराव और सूखे में संतुलित होगी।
  • इसके पौधे 50 से 60 सेमी. के ऊचाई के होते है ।
  • इसमें लगने वाले फूल सफ़ेद रंग के और फली चकनी तथा बीज गहरे पीले रंग के होते है।
  • फलियों के चटकने की समस्या नहीं है।

जेएस-9560 सोयाबीन :

  • बुवाई के लिए बीज की मात्रा 40-45 किलो बीज प्रति एकड़ पर्याप्त है।
  • सोयाबीन का उत्पादन एक एकड़ में 10-12क्विंटल तक होता है।
  • पौधों की ऊँचाई-45-50 से.होती है ।
  • इस किस्म के दाने का रंग पीला होता है।
  • 100 दानों का वज़न 13-15 ग्राम, अंकुरण क्षमता 85-90 प्रतिशत।
  • फसल की कटाई 80-90 दिन में हो जाती है।
  • इस किस्म की फसल में फूल का रंग बैंगनी होता है।
  • यह किस्म कम वर्षा होने पर भी अच्छा उत्पादन देती है।
राज प्रज्ञा 18 सोयाबीन :
  • सोयाबीन की यह नयी उन्नत किस्म है ।
  • फसल अवधि 91 से 95 दिन की होती है।
  • पौधे की ऊंचाई 50-60 सेंटीमीटर तक होती है
  • 22 से 27 क्विंटल प्रति हेक्टियर उत्पादन ।
  • इस क़िस्म के फूलों का रंग सफेद होता है ।
  • पत्तियों का आकार तीखी सकरी होती है।
  • फलियां चटकने (शेट्रिंग ) की समस्या नही होती है।
  • पौधो की उंचाई अच्छी होने से हार्वेस्टर से काटने योग्य फसल होती है।
  • पीला मोजेक ,कालर रॉट एवं रूट रॉट के प्रति सहनशीलता का विशेष गुण है।
जेएस-2069 सोयाबीन:

  • यह किस्म 95 से 100 दिन में पक्कर तैयार हो जाती है।
  • इस किस्म का दाना चमकदार होता है ।
  • 100 दानों का वजन 10 से 11 ग्राम होता है।
  • फूल आने की अवधि 40 दिन की होती है।
  • इस क़िस्म के फूलों का रंग सफेद होता है ।
  • फलियों के भूरे रंग के फटने की समस्या नहीं होती है।
  • यह रोग प्रतिरोधक क्षमता और उच्च उत्पादन क्षमता के कारण किसानों के लिए वरदान है।

सोयाबीन की उपज मुख्य रूप से फसल प्रबंधन पर निर्भर करती है। यदि अनुसंशित विधि से सोयाबीन की खेती की जाय, तो सामान्यतः पैदावार 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त की जा सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button