नोडल मंत्रालय के मंत्री होने के बावजूद पट्टों के लिए तरस रहे बैतूल जिले के आदिवासी।
भीमपुर आंदोलन ने खोली व्यवस्था की परतें । जयस, समस्त आदिवासी संगठन और सर्व समाज संगठन के बैनर तले किसानों ने किया जोरदार आंदोलन । वनभूमि से विस्थापन का लगाया आरोप, नोडल मंत्रालय होते हुए भी वनाधिकार पट्टे अटके।

बैतूल। जिस जिले का प्रतिनिधित्व केंद्रीय जनजाति कार्य राज्य मंत्री करते हैं, उसी जिले में आदिवासियों के वनाधिकार दावे लंबित पड़े हों तो सवाल उठना स्वाभाविक है। भीमपुर में जयस, समस्त आदिवासी संगठन और सर्व समाज संगठन के बैनर तले किसानों ने इसी मुद्दे पर जोरदार आंदोलन कर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सीधा हमला बोला। वनाधिकार पट्टों से लेकर बिजली कटौती, ट्रांसफॉर्मर धोखाधड़ी, ताप्ती मेघा रिचार्ज, ढेंगना जलाशय परियोजना और अतिक्रमण तक, हर मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई।

जयस प्रदेश संयोजक जामवन्त सिंह कुमरे ने कहा कि केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उईके का मंत्रालय व्यक्तिगत और सामुदायिक वनाधिकार दावों का नोडल मंत्रालय है, जो वनाधिकार अधिनियम के तहत कानून संबंधी मामलों की निगरानी करता है और मासिक प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करता है।
तारांकित प्रश्न 949 के जवाब में मंत्री ने 5 फरवरी 2026 को 44,33,940 व्यक्तिगत और सामुदायिक दावे की बात बताई है, जो किसी एक प्रदेश के अधिकारो के बराबर है, जो सरकार की नीयत में खोट को दर्शाता है।
– हजारों सामुदायिक वनाधिकार पट्टे लंबित
वहीं बैतूल जिले में ग्राम पंचायत स्तर पर मुठवा देवस्थान, पेनकड़ा, खंडराई, श्मशान, गौठान और चरनोई भूमि के हजारों सामुदायिक वनाधिकार पट्टे लंबित हैं। उन्होंने कहा कि जब राज्य स्तरीय निगरानी समिति तिमाही बैठक कर सत्यापन और अंतरण की समीक्षा करती है, तब जिले में यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है।
आंदोलन में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि ताप्ती मेघा रिचार्ज, ताप्ती कंजरवेशन रिजर्व, फायरिंग रेंज, अभयारण्य और खनिज उत्खनन के नाम पर आदिवासी भूमि पर दबाव बनाया जा रहा है।
– लगातार बिजली कटौती से किसानों की फसलें प्रभावित
ढेंगना जलाशय परियोजना को लेकर भी विस्थापन की आशंका जताई गई। साथ ही भीमपुर क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती से किसानों की फसलें प्रभावित होने और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होने की बात उठाई गई। ट्रांसफॉर्मर लगाने के नाम पर निजी ठेकेदारों द्वारा किसानों से अवैध वसूली और राशि लेकर फरार होने के आरोप लगाते हुए सख्त एफआईआर और कड़े कानून की मांग की गई।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वनाधिकार पट्टों और अन्य मांगों पर शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो भीमपुर से उठी यह आवाज बड़े आंदोलन में बदल सकती है।




