Cow mother became ‘Rajmata’: महाराष्ट्र में गौमाता बनीं ‘राजमाता’ बैतूल के गौ सांसद युवराज मालवीय श्री गौड़ ने कहा- मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का यह ऐतिहासिक कदम

बैतूल। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए गौमाता को ‘राजमाता’ का दर्जा प्रदान किया है। बैतूल जिले के गौ सांसद युवराज मालवीय श्री गौड़ ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह गौध्वज स्थापना यात्रा की बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय महाराष्ट्र, सहित पूरे देश के लिए आदर्श है, और इस कदम के लिए महाराष्ट्र सरकार और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे जी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में गौ माता को राजमाता बनाने का आव्हान किया।

जानकारी के अनुसार, शंकराचार्य जगतगुरु स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गौ प्रतिष्ठा आंदोलन और गौ ध्वज स्थापना पदयात्रा के दौरान लिया गया। यह पदयात्रा 22 सितंबर 2024 को अयोध्या से प्रारंभ हुई थी, जो 36 प्रदेशों की यात्रा कर रही है। गौ सांसद युवराज मालवीय श्री गौड़ ने बताया यात्रा के दौरान जब यह महाराष्ट्र पहुंची, तब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गौमाता को ‘राजमाता’ घोषित कर दिया। इस ऐतिहासिक निर्णय से बैतूल सहित पूरे देश में खुशी की लहर है। गौ प्रतिष्ठा आंदोलन के तहत महाराष्ट्र सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम की देशभर में सराहना हो रही है, विशेषकर बैतूल जिले में इस निर्णय का विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

ज्ञात हो कि शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने अपने चातुर्मास के दौरान महाराष्ट्र सरकार से गौमाता को राजमाता घोषित करने का आग्रह किया था। इस संदेश को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गहराई से समझा और तुरंत अपने उद्योग मंत्री को शंकराचार्य जी के पास दिल्ली भेजकर इस निर्णय की नींव रखी। शंकराचार्य जी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि गौमाता को ‘राजमाता’ का दर्जा मिलना चाहिए, और आज महाराष्ट्र सरकार ने इस ऐतिहासिक निर्णय को लागू करते हुए गौमाता को राजमाता घोषित कर दिया। इस फैसले की कॉपी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शंकराचार्य जी के चरणों में समर्पित की।

गौ सांसद ने बताया शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी द्वारा शुरू की गई गौध्वज स्थापना यात्रा का मुख्य उद्देश्य देशभर में गौमाता की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस यात्रा को 36 प्रदेशों का समर्थन प्राप्त है, और हर राज्य में गौमाता को राजमाता का दर्जा दिए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा इस यात्रा के समर्थन में उठाया गया कदम, निश्चित रूप से अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकता है।

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