ग्लोबल पब्लिक स्कूल में इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर नाटक का हुआ मंचन।

बैतूल। आदिम कल्चरल एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा राकेश वरवड़े के निर्देशन में सोमवार को हरिशंकर परसाई जी लिखे व्यंग्य “इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर” का मंचन ग्लोबल पब्लिक स्कूल में किया गया।

राकेश वरवड़े ने बताया कि इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर कहानी भारत के मुख्य व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई जी की लोकप्रिय व्यंग्य रचना है। इस कहानी में पुलिस के अत्याचारों की ओर लोगों का ध्यानाकर्षण किया गया है। यह एक फैंटसी शैली में लिखी गई रचना है।

सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर मातादीन जो कि कहानी का मुख्य पात्र है, जिसे डिपार्टमेंट में सभी एमडी साहब के नाम से जानते हैं। यह सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर है जो पुलिस विभाग का प्रतिनिधित्व करता है। पुलिस मंत्री चाहते हैं कि पुलिस विभाग का नाम हो ऐसा कुछ करने के लिए मातादीन को कुछ सलाह देते है।

कहानी में इंस्पेक्टर मातादीन को चांद के प्रधानमंत्री अपने यहां के पुलिस की ट्रेनिंग के लिए बुलाती है। मातादीन के चांद पर आने से पहले सब कुछ ठीक चलता है लेकिन मातादीन के आते ही चांद की पुलिस में पुलिसिया विभाग में परिवर्तन हो जाता है। सच को झूठ और झूठ को सच बनाने का प्रक्रिया शुरू हो जाता है।

हरिशंकर परसाई की कहानी इंस्पेक्टर मातादीन चांद पुलिस के द्वारा की गई कार्रवाई और कार्यप्रणाली को बतलाता है ।

यह कहानी फ़ेंटेसी शैली में लिखी गई है। इसमें पुलिस के अत्याचारों को दिखाया गया है। कहानी में हास्यास्पद स्थिति और कार्यप्रणाली है। मातादीन के आने से पहले चांद सब ठीक चलता है, लेकिन मातादीन के आने के बाद चांद की पुलिस में बदलाव हो जाता है। सच को झूठ और झूठ को सच बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। आम नागरिकों का जीना मुश्किल हो जाता है। अंत में चांद के प्रधानमंत्री मंत्री मातादीन को वापस भारत लौटने का आदेश देते हैं।

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