सेंट्रल रेलवे इंस्टीट्यूट आमला के चुनाव में संघर्ष के बावजूद प्रगति पैनल नहीं कर सका जीत दर्ज

आधिकारिक परिणामों में पैनल को हार का सामना करना पड़ा, अंतिम नतीजों में नहीं मिल सकी सफलता 

आमला। सेंट्रल रेलवे इंस्टीट्यूट आमला में 13 अक्टूबर को हुए चुनाव शांतिपूर्ण, उत्साहपूर्ण और लोकतांत्रिक माहौल में सम्पन्न हुए। इस चुनाव में सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ (CRMS) ने “प्रगति पैनल” के नाम से अपना पैनल मैदान में उतारा था, जिसने पूरे दमखम और प्रतिबद्धता के साथ चुनाव लड़ा। रेलवे कर्मचारियों का उत्साह देखने लायक था, परंतु इस बार परिणाम ‘प्रगति पैनल’ के पक्ष में नहीं रहे।

सीआरएमएस के “प्रगति पैनल” से सचिव पद के लिए मनोज कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष पद के लिए राहुल नागले, सदस्य पदों के लिए हरिशंकर पटवारी, महेंद्र कुमार यादव, नरेश सिंवाल, प्रवेश कुमार, रविशंकर कुमार, शैलेश तारपे और तरुण मानकर ने चुनाव लड़ा। पैनल ने पूरे अभियान के दौरान कर्मचारियों से जुड़ाव और संगठन के प्रति समर्पण का भाव दिखाया, परन्तु अंतिम नतीजों में उसे सफलता नहीं मिल सकी। मतदान के दिन बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने मताधिकार का उपयोग करने पहुंचे। चुनाव में भाग लेने वाले सभी उम्मीदवारों ने गरिमा और संगठनात्मक एकता का परिचय दिया।

इस अवसर पर सीआरएमएस के मंडल अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह, मंडल सचिव राकेश कुमार, संभागीय समन्वयक बी.एस. ताकसांडे, सीआरएमएस नागपुर मुख्य शाखा के अध्यक्ष एम.डी. मुजाहिद, एडमिन शाखा नागपुर के अध्यक्ष अभिजीत, सदस्य जितेश ठाकरे और आमला शाखा के सचिव सतीश मीणा उपस्थित रहे। सभी ने चुनाव में भाग लेने वाले उम्मीदवारों का मनोबल बढ़ाया और निष्पक्ष प्रक्रिया की सराहना की।

नतीजे घोषित होने के बाद, प्रगति पैनल की ओर से नेतृत्व ने सभी सदस्यों और समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भले ही जीत इस बार हाथ से निकल गई हो, लेकिन संगठन के भीतर एकता, संघर्ष और सहयोग की भावना पहले से और मजबूत हुई है। सीआरएमएस के नेताओं ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में यह अनुभव संगठन को नई दिशा देगा और रेल कर्मचारियों के हित में संघर्ष जारी रहेगा।

सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ ने इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि यह चुनाव संगठनात्मक लोकतंत्र का एक सुंदर उदाहरण रहा। प्रगति पैनल की मेहनत, प्रतिबद्धता और अनुशासन ने सभी का दिल जीत लिया, भले ही नतीजा अनुकूल न रहा हो। आमला रेलवे इंस्टीट्यूट का यह चुनाव लंबे समय तक याद रखा जाएगा, क्योंकि इसमें संगठन के हर स्तर पर एकता और सहयोग की मिसाल देखने को मिली।

सीआरएमएस के मीडिया प्रभारी से मिली जानकारी के अनुसार कुछ समाचार पत्रों में प्रारंभिक जानकारी के आधार पर गलती से ‘प्रगति पैनल’ को विजयी घोषित कर दिया गया था, जबकि आधिकारिक परिणामों में पैनल को हार का सामना करना पड़ा। इस त्रुटि को लेकर संगठन ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक स्थिति यही है कि ‘प्रगति पैनल’ ने संघर्ष तो शानदार किया, परंतु जीत हासिल नहीं कर सका।

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