विज्ञान प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने बताये जादू के पीछे के वैज्ञानिक कारण

समाज को जागरूक करने आगे आए बच्चे, विज्ञान से बताया हर चमत्कार का सच

बैतूल। विकासखण्ड स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी अंतर्गत विज्ञान के प्रति जागरूकता अभियान जादू नहीं विज्ञान है-समझना समझाना आसान है कार्यक्रम का आयोजन 08 दिसम्बर 2025 को ई. एफ. ए. शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैतूल गंज बैतूल में किया गया। पूरे आयोजन का संचालन प्राचार्य ललीतलाल लिल्होरे के मार्गदर्शन में हुआ, जिसमें बैतूल विकासखण्ड के कक्षा 9 से 12 तक के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रभारी शिक्षक महेश गुंजेले ने जानकारी देते हुए बताया कि जादू नहीं विज्ञान है अभियान का उद्देश्य समाज में फैले अंधविश्वास को दूर करना, वैज्ञानिक सोच विकसित करना और तार्किक समझ को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि आग से खेलना, चीजों को गायब कर देना या मंत्र शक्ति से आग उत्पन्न करना जैसे तथाकथित जादुई करतब वास्तव में रसायन, भौतिकी और हाथ की सफाई जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। इस अभियान का लक्ष्य यही है कि लोग भ्रम से निकलकर हर घटना के पीछे का कारण समझें और समस्याओं को तर्क और ज्ञान से हल करें।

विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने विज्ञान नाटिका प्रस्तुत कर अंधविश्वासों का खंडन किया और बताया कि कई चमत्कार समझे जाने वाले करतब केवल वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। प्रदर्शनी में विज्ञान के चमत्कार के रूप में पानी में आग लगाना, मंत्र शक्ति से आग पैदा करना, नारियल में आग लगा देना, नजर उतारना, फोटो से भभूत गिराना, अण्डा को खड़ा करना, थर्माकोल गायब करना, नींबू से खून निकालना, जादुई तिलक, पीलिया झाड़ना जैसे अनेक प्रयोग किए गए और उनके पीछे के वैज्ञानिक कारण समझाए गए।

अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं में डेनिस पंवार शासकीय हाई स्कूल खेड़ी सांवलीगढ़, कुमारी रमसा सुहाना शासकीय हाई स्कूल गर्ग कॉलोनी, कुमारी खुशी साहू शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भडूस, कुमारी नेहा राठौर, कुमारी आरूषी सोनपुरे शासकीय सांदिपनी कृषि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैतूल बाजार, कुमारी खुशबू, कु. दिव्यांशी शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैतूल तथा विज्ञान नाटिका शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामठी को जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित किया गया।

प्रतियोगिता सम्पन्न कराने में रीना श्रीवास्तव, रेखा बारपेठे, गुणवंत देशमुख, कृष्ण गोपाल बारमासे, एस. पी. मोहबे, अशोक कवड़े, करण पंवार आदि शिक्षकों का विशेष सहयोग रहा।

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