स्वर कोकिला लता जी की पुण्य तिथि 6 फरवरी पर विशेष भाग 11: हेमंत चंद्र दुबे बबलू
हेमंत चंद्र दुबे बबलू ✍🏻

स्वर कोकिला लता जी की पुण्य तिथि 6 फरवरी पर विशेष भाग 11
*स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी के नाम से भारत रत्न जुड़ स्वयं भारत रत्न, भारत रत्न कहलाने का हकदार हो सका, अगर अटल जी देश के प्रधानमंत्री नहीं होते तो लता दीदी भारत रत्न, नहीं कहला पाती*
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एक गाना ए मेरे वतन के लोगों जरा कुछ याद उन्हें भी कर लो , यही वह पंक्तियां है जो शहीद क्रांतिकारियों, देश के वीरों को सम्मान दिलवा सकती है।
1962 जब चीन युद्ध के बाद यह पंक्तियां लता जी के कंठ और दिल से निकली , तो देश के प्रधानमंत्री नेहरू जी से लेकर पूरा देश रो पड़ा और आज इस गीत को गाए 64 वर्ष हो रहे हैं , लेकिन आज भी यह गीत देश के हर नागरिक की आंखों से अविरल आंसुओं की धारा प्रस्फुटित कर देता है, क्या युवा ,क्या बुजुर्ग सब रो पड़ते है। हम तो सफर करते हैं यह पंक्ति आते आते तो हमारी आंखों से देश भक्ति की गंगा अश्रुओं के रूप में निकल पड़ती है, कोई गोरखा , कोई मद्रासी ये शब्द देश को एकता के सूत्र में बांध देते है। यह गाना लता जी के नाम से अजर अमर है तो कवि प्रदीप भी इस गाने के रचयिता होने के नाते अमर है।
15 अगस्त 26 जनवरी का भारत का सूरज इस गीत के स्वर लहरियों के साथ उदित होता है। अजर अमर गीत, लेकिन विडम्बना देखिए गीत को गाने के लिए देश के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लता जी से व्यक्तिगत अनुरोध किया और वे स्वयं इस गीत को सुनने के लिए उपस्थित रहे , न जाने कितने योग्य, सुलझे हुए, विचारवान प्रधानमंत्री इस देश को 2001तक मिले लेकिन लता दीदी भारत रत्न नहीं कहला सकी, और इसलिए कहना पड़ता है कि यदि अटल जी देश के प्रधानमंत्री नहीं होते तो लता जी संभवतः इस देश में आज तक भारत रत्न नहीं कहला पाती। जब आज के दिन ही लता जी का अंतिम संस्कार संपन्न किया जा रहा था, तब हमारी सरकारों ने दाह संस्कार स्थल पर लता जी को श्रद्धांजलि देते जो बोर्ड लगाया उसमें उनके नाम के आगे श्रीमती लगाया, जिस तपस्विनी ने सिर्फ और सिर्फ इस एक शब्द को अपनी संगीत साधना के चलते जीवन में प्रवेश नहीं करने दिया उन्हें उसी शब्द के साथ अंतिम विदाई देने का प्रयास हमारी चुनी हुई सरकारों ने किया।
आज लता दीदी की पुण्य तिथि है उनके नाम के आगे भारत रत्न लिखा , इस देश के हर नागरिक को संतोष के साथ गर्व का अनुभव होता है और हर नागरिक को महसूस होता है कि वह भारत रत्न है।
मुझे कैंसर के उपचार के लिए नियमित मुंबई जाना होता था, एक दिन मैं और मेरी पत्नी बस से मुंबई दर्शन के लिए निकले, भ्रमण करते हुए हमारा मार्गदर्शक सभी स्थान उनके महत्व को बताते जा रहा था, अंबानी के भव्य एंटीला हाउस को दिखाते हुए बताया यह अंबानी का महल सभी ने बस में से बैठे बैठे ही खिड़की से आंखें आसमान के ओर ऊंची इमारत को निहारते हुए कहा अरे बाप रे कितना ऊंचा। थोड़ी देर आगे बढ़े बस के ड्राइवर ने बस रोक दी और गाइड ने कहा यह सामने जो साधारण सा घर देख रहे है यह लता मंगेशकर दीदी का घर है आप यकीन मानिए सब यात्री बस से नौचे उतर गए अपने चप्पल जूते उतार दिए कोई हाथ जोड़कर खड़ा था , कोई आंखे बंद किए हुए थे , कोई नतमस्तक था, और यह दृश्य इस बात का एहसास करा रहा था कि लता मंगेशकर दीदी भारत रत्न है? जो अपने व्यक्तित्व से आम नागरिक की भावनाओं से गहरे तक जुड़ा होता हैं ,वह भारत रत्न या पद्म सम्मान होता है। इंसान को पद , वैभव, राजनीति की मजबूरी फाइल का प्रबंधन भारत रत्न या पद्म सम्मान का हकदार नहीं बनाता बल्कि उस इंसान के कार्य की खुशबू उसको भारत रत्न या पद्म सम्मान बनाती है, जैसे लता दीदी। लेकिन आज तो भारत रत्न, पद्म सम्मान, फाइल प्रबंधन, राजनैतिक पहुंच , राजनैतिक स्वार्थ सिद्धि का साधन बन चुका हैं। इस देश में योग्यता को देखकर यदि सम्मानों को दिये जाने की परिपाटी होती तो पदों पर विराजित व्यक्ति उस समय सम्मानित होते जब वे पद पर नहीं होते लेकिन हमारे देश में पद पर जब व्यक्ति होता हैं तब ही उसकी योग्यता दिखलाई देने लगती हैं परिणामस्वरूप जब अटल जी संघर्ष करते थे तब वे भारत रत्न नहीं थे, प्रधानमंत्री बनने के बाद ही वे भारत रत्न कहला सके। सभी राष्ट्रपति प्रधानमंत्री अपने संघर्षों के कारण भारत रत्न नहीं कहलाए बल्कि पद पर आसीन होने के बाद भारत रत्न के हकदार बन सके।
आज लता दीदी की पुण्य तिथि हम सभी उनके चरणों में नतमस्तक है, अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते है और जब लता दीदी के नाम से भारत रत्न जुड़ता है तो भारत रत्न का सम्मान स्वयं सम्मानित हो जाता हैं और महसूस होता हैं कि भारत रत्न सम्मानों की गरिमा इस देश में है।
हेमंत चंद्र दुबे बबलू




