सूर्यवंशी ढोलेवार कुन्बी समाज ने पलक-पावड़े बिछाकर किया कांवड़ियों का वंदन,जिला अध्यक्ष राकेश गंगारे के नेतृत्व में कांवड़ यात्रियों का हुआ ऐतिहासिक सत्कार
मां ताप्ती का जल लेकर अभिषेक करने निकले कांवड़ियों का खेड़ी हनुमान मंदिर पर भव्य स्वागत

बैतूल। बम-बम भोले के गगनभेदी जयकारों और हर-हर महादेव के पावन उद्घोष के साथ सोमवार को जब सूर्यपुत्री पुण्य सलिला मां ताप्ती का पवित्र जल लेकर कांवड़ियों का जत्था आगे बढ़ा, तो पूरा वातावरण शिवमय हो गया। भक्ति की इस पावन अविरल धारा का आज उस समय ऐतिहासिक संगम देखने को मिला, जब सूर्यवंशी ढोलेवार कुन्बी समाज द्वारा आस्था के इन पथिकों के स्वागत में पलक-पावड़े बिछा दिए गए।
सूर्यवंशी ढोलेवार कुन्बी समाज के जिला अध्यक्ष राकेश गंगारे के नेतृत्व में ताप्ती नदी से जल लेकर आ रहे कांवड़ियों का खेड़ी स्थित हनुमान मंदिर के समीप भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया गया। मान्यता है कि सावन के इस पवित्र मास में जो भक्त मां ताप्ती के शीतल जल से देवाधिदेव महादेव का अभिषेक करता है, उसके जीवन के समस्त कष्टों का हरण स्वयं शिव कर लेते हैं। इसी अटूट श्रद्धा को नमन करते हुए समाज द्वारा कांवड़ियों की सेवा का संकल्प लिया गया।
– भक्ति और सेवा का अनुपम संगम
इस भव्य स्वागत समारोह में बाजपुर, आरुल, दनोरा, खेड़ी, विनोबा नगर, खंजनपुर और बैतूल बाज़ार से आए बड़ी संख्या में कांवड़ियों का उत्साह देखते ही बनता था। खेड़ी के हनुमान मंदिर के पावन परिसर में शिवभक्तों का न स्वागत किया गया, उनके विश्राम और स्वल्पाहार की भी विशेष व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं के चेहरे पर ताप्ती से जल लाने की थकान के स्थान पर शिव भक्ति का तेज साफ झलक रहा था।
– समस्त समाज जनों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस पुनीत कार्य में जिला अध्यक्ष राकेश गंगारे के साथ जिला सचिव शिव गंगारे, नरेन्द्र कापसे, गंगाराम पारधे, गुणीराम गंगारे, राजाराम पारधे एवं बड़ी संख्या में उत्साही युवा साथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया। इन सभी सेवाभावी सदस्यों ने कांवड़ियों की सेवा को ही शिव सेवा मानकर स्वल्पाहार वितरित किया और उनके सफल एवं सुखद मंगल यात्रा की कामना की।
– पौराणिक कथाओं में ये है मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां ताप्ती सूर्य की पुत्री हैं और उनका जल परम पावन माना गया है। जब कांवड़िए इस जल को कांधे पर रखकर चलते हैं, तो वे साक्षात् तपस्या का प्रतिरूप बन जाते हैं। खेड़ी के पास हुए इस ऐतिहासिक स्वागत ने श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन किया, समूचे क्षेत्र को भक्ति के सागर में सराबोर कर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात् महादेव अपने भक्तों की इस सेवा और श्रद्धा को देखकर प्रसन्न होकर आशीष प्रदान कर रहे हों।




